गमों के बादल!

कैसे है आप सभी लोग? आशा करती हूं कि आप सभी लोग सकुशल अपने परिवार के साथ सुरक्षित होंगे।

चलिए “बातें कुछ अनकही सी,” के किस्से को आगे बढ़ाते है।

आज की कविता उस आशा के नाम, जिसका दीपक हम सभी के दिलों में जल रहा है। ज़ाहिर है कठिन वक्त है पर हौंसला नहीं खोना है।

गमों के बादल!

गमों के बादल छंट ही जाएंगे और फिर से रोशनी का नया सूरज निकलेगा।

फिर से खिल उठेगा आँगन, महकते फूलों की खुशबूओं से, फिर से ये वीराना चमन बनेगा।

आएंगे फिर से खुशियों के मौसम और फिर से कोई पगला दीवाना बनेगा।

सच है कि आसां नहीं होता, मायूँसियों के भँवर से बाहर निकलना,

पर ये भी सच है कि आशा की सिर्फ एक किरण से गमों का अंधेरा दूर भगेगा।

फिर से खिल उठेगा आँगन, महकते फूलों की खुशबूओं से, फिर से ये वीराना चमन बनेगा।

छोटी सी ही तो है ये ज़िन्दगानी, पता नहीं कब कौन आएगा और कब कौन चला जाएगा?

तो अच्छा है जब पता है इतनी बात, तो ये समझना और भी आसां हो जाएगा।

अगर साथ हो अपनों का तो हर मुश्किल का सामना करना आसां हो जाएगा।

पर गर हो अकेले तुम राहों में तो गम नहीं, खुद तेरा हौंसला ही तुझे राह दिखाएगा।

फिर से खिल उठेगा आँगन, महकते फूलों की खुशबूओं से, फिर से ये वीराना चमन बनेगा।

©® दीपिका

आशा करती हूं कि इस कविता ने थोड़ी सकारात्मकता जरूर दी होगी।

वो एक फ़रिश्ता!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत जो कुछ खो सी गई है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है ज़माने में!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

पॉडकास्ट सुने।https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Umeed-Abhi-Bhi-Baki-Hai-ebf502

30 thoughts on “गमों के बादल!

  1. Deepika, Cant tell you how good I felt while reading this. I think, right now, we al are craving for such time to come.
    फिर से खिल उठेगा आँगन, महकते फूलों की खुशबूओं से, फिर से ये वीराना चमन बनेगा। पर आशा की सिर्फ एक किरण से गमों का अंधेरा दूर भगेगा।

    Liked by 1 person

  2. You post is like a ray of sunlight in this difficult time deepika and I hope ki ye gam ke badal jaldi hi chhat jaye aur phir se roshni ka naya sooraj nikle.

    Like

  3. What an apt poem for these times. Reminded me of the song…
    कहाँ तक यह मन को अंधेरे छलेंगे उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे

    Liked by 2 people

  4. ‘Aasha ki ek kiran se ghamon ka andhera dhoor bhagega’. So true. We need encouraging poetry in these difficult times. This poem definitely provides a ray of hope.

    Like

  5. गमों के बादल छंट ही जाएंगे और फिर से रोशनी का नया सूरज निकलेगा। wahh.. This is the spirit of hope. Har din yeh kavitayein bas dil ko chhu jaati hai. And in these days, your poems are a dose of hope and positivity always. Heart touching one. I am also writing on hope tomorrow.

    Like

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.