लक्ष्य जरूर बनाओ।

लक्ष्य जरूर बनाओ, दुनिया को बताओ या ना बताओ।
छोटे छोटे ही सही पर एक एक कदम आगे बढ़ाओ।।

ये कर्मक्षेत्र है तुम्हारा, तो जाहिर है कि अधिकार क्षेत्र भी, तुम्हारा ही होगा।
हर सही गलत में संभल कर कंकड़ों से खालिश हीरा अब चुनना ही होगा।।

हार मान जाना, हल नहीं है किसी भी मुश्किल का।
आँसू पोंछ कर, अब नई ऊर्जा से अपनी बाजुओं में बल भरना ही होगा।।

तुम युवा हो, संभावनाओं का असीम भंडार है तुम में।
अपने हर डर से लड़ते हुए अब खुद अपने लिए चुनौती बनना ही होगा।।

©®दीपिका

जरूर देखे, क्या है ज़िंदगी?

https://youtu.be/6p8LLp1gyNg

वो पहला कदम

हर वो पहला कदम उठाना मुश्किल होता है।
आशंकाओं भरे दिल को समझाना मुश्किल होता है।।

पता नहीं दूसरे देखते है हमें किस नजरिए से,
उनके हर सवाल का जवाब बन जाना मुश्किल होता है।

ये ज़िन्दगी हमारी है, कुछ फैसले हमारे भी हो सकते है,
खुद के लिए लिया हुआ एक फैसला उनके लिए पचाना मुश्किल होता है।

जब तक चले दूसरों के दिखाए रास्ते पर, तब तक तो ठीक।
अपने चुने हुए रास्ते को मंज़िल तक पहुँचाना मुश्किल होता है।

हर वो पहला कदम उठाना मुश्किल होता है।
आशंकाओं भरे दिल को समझाना मुश्किल होता है।।

©®दीपिका

अलविदा 2019!

बीत गयी जो बात गयी, बीती सारी बिसार दे।
आशाओं के फूल खिला और मायूसियों को निथार दे।।

हिम्मत, साहस और विश्वास है सारथी तेरे राह के।
अपनी नियति तू खुद तय कर, सारी आशंकाओं को भुला के।।

नयी डगर है ये, नया आगाज़ है, दस्तक है नए सहर की।
गर कोशिशों में है शिद्दत पूरी तो फिर क्या फ़िक्र मुश्किलों की।।

संजोकर सारी सुहानी यादों को, वादा करते है कुछ और नयी यादें बनाने का।
ससम्मान अलविदा करते है 2019 को और दिल से स्वागत करते है नए साल 2020 का।

नया साल मुबारक आप सभी को।

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Alvida 2019! Welcome 2020! बीत गयी जो बात गयी, बीती सारी बिसार दे। आशाओं के फूल खिला और मायूसियों को निथार दे।। हिम्मत, साहस और विश्वास है सारथी तेरे राह के। अपनी नियति तू खुद तय कर, सारी आशंकाओं को भुला के।। नयी डगर है ये, नया आगाज़ है, दस्तक है नए सहर की। गर कोशिशों में है शिद्दत पूरी तो फिर क्या फ़िक्र मुश्किलों की।। संजोकर सारी सुहानी यादों को, वादा करते है कुछ और नयी यादें बनाने का। ससम्मान अलविदा करते है 2019 को और दिल से स्वागत करते है नए साल 2020 का। #deepikamishra #newyearwishes #alvida2019 #welcome2020 #myaspiringhope #deepikawrites #mommyblogger #Inspirationalblogger #ahmedabadblogger

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©®दीपिका

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https://youtu.be/9VHsoy4Fqas

कद बड़ा या सोच?

शालिनी चुलबुली सी और प्यारी सी एक लड़की थी जो हमेशा हँसती खेलती रहती थी। पढ़ाई में अव्वल, खेल कूद में आगे, घर के कामों में निपुण। सब कुछ परफेक्ट सा था उसका। किसी का दिल दुखाना क्या होता है? उसे पता तक नहीं था, अपनी दुनिया में मस्त एक ज़िम्मेदार लड़की, बस एक ही कमी थी उसमें लोगों के हिसाब से, उसकी हाइट।

हाँ, छोटे कद की थी वो और उसकी इस शारीरिक कमी के लिए उसे न जाने क्या क्या सुनना पड़ता था? मानों उसके हाथ में था ये सब! उसने जानबूझकर अपना कद कम किया हो।

उसकी सारी अच्छाइयों को छिपाने के लिए उसके कद को जरिया बनाया जाता था। उसे जताया जाता था हमेशा की वो छोटी है, उसका मजाक बनाया जाता था कि ये नहीं कर सकती वो, यहाँ नहीं पहुँच सकती वो, ये तो इसके बस का ही नहीं है, वगेरह वगेरह।

शालिनी को बुरा तो बहुत लगता था पर वो उन्हें जवाब देना जरुरी नहीं समझती थी। उसने सोच लिया था कि वह लोगों के तानों का जवाब अपने हुनर से देगी, अपने काम से देगी, उनसे लड़ कर नहीं। जैसे जैसे उसकी उम्र शादी के लायक होती गई लोगों के ताने भी बढ़ गए पर उसने परवाह नहीं की।

धीरे धीरे शालिनी की माँ से भी कहा जाने लगा कि “तुम्हारी लड़की की हाइट तो छोटी है, कोई अच्छा लड़का नहीं मिलेगा तुम्हारी शालिनी को”। शालिनी की माँ भी पलट कर जवाब में बिना हिचके कह ड देती थी कि “क्या कमी है मेरी बेटी में? जो उसकी खूबियों को नहीं समझते उनमें और उनकी सोच में कमी है, मेरी बेटी में नहीं।”

शालिनी की माँ लोगों से तो कह देती थी पर मन ही मन वो भी जानती थी लोगों की सोच को और डरती थी अपनी बेटी के भविष्य को लेकर। उसने कभी भी शालिनी को जाहिर नहीं होने दिया पर शालिनी समझ गयी थी अपनी माँ की चिंता को।

उसने माँ से आगे बढ़कर बात की और उसे समझाया, “माँ आप चिंता मत करो।” जो इंसान मेरे व्यक्तिव से नहीं, मेरे बाहरी रंग रूप से मेरी पहचान करेगा वो ज़िंदगी भर मेरा साथ क्या निभायेगा? मैं जैसी हूँ,वही मेरी पहचान है।

वो आगे बोली, “माँ आपने वो कहावत तो सुनी होगी की “बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर? पंछी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।”

मैं अपनी कमी को अपनी ताकत से हरा दूंगी। और तब ही शादी करुँगी जब मुझे, मैं जैसी हूँ वैसे ही स्वीकार किया जाएगा और वो भी सम्मान के साथ, तब तक हम इस बारे में बात भी नहीं करेंगे।

शालिनी लोगों की कही बातों को पीछे छोड़ कर और अपनी माँ को समझाकर अपनी आईएस की परीक्षा की तैयारी में पूरे जोर शोर से लग गयी, “अब उसका एक ही लक्ष्य था अपनी योग्यता से अपने व्यक्तिव की पहचान बनाना ना की अपने कद से।”

रिजल्ट आया तो सब हैरान हो गए, शालिनी ने पहले ही प्रयास में आईएस क्लियर कर लिया था और साथ में ही कर दिया उन सभी लोगों का मुँह बंद जो हमेशा उसे कोसने के लिए ही मुँह खोलते थे।

कुछ ही महीनों में उसने अपने व्यक्तिव से,अपने काम से अपनी एक अलग पहचान बना ली थी और बना ली थी जगह समीर के दिल में भी। समीर शालिनी को अपना जीवन साथी बनाना चाहता था उसकी अच्छाइयों की वजह से न कि वो कैसी दिखती है इस वजह से।

शालिनी बहुत खुश थी कि उसकी खोज पूरी हो गयी उसे वो मिल गया जिसकी सोच उसकी सोच से मेल खाती है।

कैसी लगी आज की कहानी, कमेंट करके जरूर बताये।और अगर अच्छी लगी हो तो फॉलो जरुर करे।

©®दीपिका

ज़िंदगी को जिताना है।

जब भी सुनती हूँ किसी आकस्मिक निधन के बारे में, जिसका ताल्लुक आत्महत्या से होता है तो मन में ढेरों सवाल कौंध जाते है।

सवाल बदलते परिवेश के बारे में, सवाल जो कि मुझे अन्दर तक झकझोर जाते है।

मन सिहर उठता है उन भावनायों के बारे में सोचकर कि क्यूँ किसी ने ऐसा फैसला लिया होगा?

क्यूँ आइडियल ज़िंदगी की परिभाषा को धता बता कर अपना जीवन खत्म कर लिया होगा।

शायद उसे विश्वास हो चलता है कि उसके रहने ना रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

या खुद को वो और घुटता हुआ नहीं देख सकता।

एक कमज़ोर पल उससे क्या से क्या करवा जाता है?

अगर थोड़ी सी हिम्मत दिखाता इस मुश्किल घड़ी में तो शायद खुद को अपनों के बीच में खड़ा पाता।

हम कोई नहीं है किसी की निजी ज़िंदगी में झांकने वाले।

पर अगर बाँट कर दुख कम हो सकता है तो क्यूँ नहीं,हम भी नहीं पीछे हटने वाले।

सवाल उठता है।

क्यूँ हार जाती है ज़िंदगी, मौत की बाहों में?
सब कुछ पाकर भी क्यूँ खो जाती है अंजानी राहों में?

शायद बात कर पाना उसके लिए बहुत मुश्किल होता होगा।
सूझती होगी ना कोई सूरत ना सीरत, हर जख्म दर्द देता होगा।

इंसानी रिश्तों से बढ़कर कुछ नहीं होता।
गर बाँटा होता दर्द उसका भी तो शायद आज वो भी ज़िन्दा होता।

क्यूँ भूल जाते है, बंद किवाड़ों के पीछे भी एक कहानी होती है।
अगर आती सुकून भरी हवा खिड़कियों से तो शायद कुछ और रवानी होती।

बस यही गुजारिश

“हो सके तो हर एक जिंदगी के लिए जीने की कोशिश करे।

हारे खुद को ना, उस गलत सोच को ही हरा दे।”

©®दीपिका

यहाँ देखिये

“रुक जाना नहीं तू कभी हार के”

https://youtu.be/1xWrKHE7dAA