मज़बूरी!!

वो आएं थे ढेरों आरजूएं लेकर शहर की ओर,

अब जब जा रहे है तो बहुत सी ख़्वाहिशें दफ़न कर जा रहे है।

पता नहीं अब कब वापस आएंगे इन रास्तों पर मुड़ कर,

जिन पर नंगे पाँव चले जा रहे है।।

जिन्हें अपने सपनों को मंज़िल पहुँचाने के लिए चुना था,

अब उन्हीं राहों को पीछे छोड़े जा रहे है।

जो बनाते थे कभी सबके सपनों का घर,

आज वही एक छत और दो जून की रोटी की तलाश में

भटके जा रहे है।।

वो आएं थे ढेरों आरजूएं लेकर शहर की ओर,

अब जब जा रहे है तो बहुत सी ख़्वाहिशें दफ़न कर जा रहे है।।

जो गलियां, जो शहर लगता था कभी अपना सा,

अब वही क्यूँ परायों की गिनती में खड़े नज़र आ रहे है।

सोचा ना था!!

एक दिन ऐसा भी आएंगा जब सड़के सूनी और शहर

वीरान हो जाएंगा।

कोई मज़दूर बेउम्मीद होकर वापस लौट जाएंगा।।

©® दीपिका

इस लिंक पर क्लिक करके कविता सुनें।

https://youtu.be/APJPn4gEY7w

काफ़ी हूँ मैं!!

लोग उठाते है सवाल मेरी शख्सियत पर,
मेरे होने पर और कुछ खोने पर।

मेरे कुछ करने पर या थम कर सुस्ताने पर,
आगे बढ़ने पर और पीछे मुड़ के ना देखने पर।

मेरे हँसने पर या घंटों रोने पर, मेरे फैसलों पर और मेरी कबिलियत पर।

मेरे सपनों पर या हकीक़त से रुबरु होने पर, मेरी मंशाओं पर और होने वाली शंकाओं पर।

पर वो भूल जाते है कि मैं आज की नारी हूँ,
खुद ही खुद के लिए काफी हूँ।

हाँ, फर्क़ नहीं पड़ता मुझे अब जमाने की बेड़ियों से,
खुले आसमां में पंख फैलाकर उड़ना सीख चुकी हूं मैं।

खुद का और अपने जैसे अनगिनत का हौंसला बढ़ाती हूँ मैं।
मुश्किलों से घबराती नहीं हूँ मैं, खुद ही खुद के लिए काफी हूँ मैं।

खुद ही खुद के लिए काफी हूँ मैं

©®दीपिका

फिर करे ज़ीरो से शुरुआत!

चलो फिर से ज़ीरो से शुरू करते है।

जो छूट गया वो छूट गया, चलो फिर अपनी चाह को आशाओं से भरते है।

क्या हुआ जो बहुत कुछ पीछे छूट गया है,

क्या हुआ जो सब पहले जैसा नहीं है।

हम फिर से शुरू करते है,

सारी आशंकाओं को भूल कर के फिर से खुद को नई ऊर्जा से भरते है।

ऐसी कोई भी मुश्किल नहीं होती जिसका कोई हल नहीं होता।

हार और जीत तो बस दिमाग़ में होती है, हारते तभी है जब कोशिशों में दम नहीं होता।

काम करने के सही तरीके को जानना बेहद जरूरी होता है।

सिर्फ़ कोरी मेहनत करने से मनचाहा फल नहीं मिलता है।

मेहनत के साथ साथ अपना उत्साह भी जोड़ना पड़ता है।

तभी कोई काम ठीक से मुक्कमल होता है।

क्या हुआ जो सब बिखर गया है? फिर से समेट लेते है।

चलो फिर ज़ीरो से शुरू करते है

यादों की बारात!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/29/yaadon-ki-baarat/

भावनाओं का एक्स रे!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/28/bhavanayo-ka-xray/

वक़्त जो ठहर सा गया है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/27/waqt-jo-thahar-sa-gaya-hai/

वजह तुम हो!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/24/vajah-tum-ho/

सपनों की उड़ान!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/24/sapno-ki-udaan/

थमी नहीं है ज़िंदगी!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/22/thami-nahi-hai-zindagi/

सुकून की तलाश!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/22/sukoon-ki-talash/

नई सहर रोशनी वाली!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/21/nayi-sahar-roshani-vali/

वक़्त जो रुकता नहीं।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/20/waqt-jo-rukta-nahi/

प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

यादों की बारात!

यादें कुछ खूबसूरत सी तो कुछ बदरंग यादें।

जहन में जिंदा रहती है बनकर कभी सबक़ तो कभी खुशनुमा सौगातें।

हर बीता पल एक याद बन जाता है,

चाहे तो भी वो वक़्त बदला नहीं जाता है।

यादें एक ख़ूबसूरत गुलदस्ते की तरह भी होती है,

जिसमें अलग अलग रंग के फूल अपनी खुशबू बिखेरते है।

कुछ जहन में बस जाते है,

तो कुछ को हम सिर्फ भूल जाना चाहते है।

यादें गवाह होती है हमारी शुरुआत की,

हमारे आगाज़ की तो हमारे अंज़ाम की।

हमारे परवाज़ की और हमारी ढ़लान की।

कुछ बुलंदियों की और उनकी चुनौंतियों की।

ऐसे ही चलता रहता है कारवाँ भूली बिसरी यादों का,

कुछ बेहद खूबसूरत तो कुछ बैरंग बातों का।

होती है!

यादें कुछ खूबसूरत सी तो कुछ बदरंग यादें।

जहन में जिंदा रहती है बनकर कभी सबक़ तो कभी खुशनुमा सौगातें।

©® दीपिका

भावनाओं का एक्स रे!

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वक़्त जो ठहर सा गया है!

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वजह तुम हो!

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सपनों की उड़ान!

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थमी नहीं है ज़िंदगी!

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सुकून की तलाश!

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नई सहर रोशनी वाली!

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वक़्त जो रुकता नहीं।

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भावनाओं का एक्स रे!

“जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी”

रामचरितमानस की ये पंक्तियाँ अपने आप में सम्पूर्ण है , भावनाओं की परख की समझ पैदा करने के लिए।

भावनाओं का एक्स रे!

जिसकी जैसी भावना होती है, वो वैसा ही प्रतिबिम्ब दूसरों में देखता है।

अगर अच्छी सोच वाला है तो अच्छा और गर मन में मैल भरा है तो बुराई ही ढूँढता है।

जिसकी जैसी भावना होती है, वो वैसा ही प्रतिबिम्ब दूसरों में देखता है।

इतना भी मुश्किल नहीं होता ये पता लगाना कि मन में क्या चल रहा है?

सीधी राह चुनी है या मन में कोई चोर पल रहा है।शख्सियत को तोलने के तराजू पहले से तैयार कर लिये जाते है।

“अरे”…! “बेचारा,” “इसके बस का तो कुछ नहीं” के जुमले मन को तार तार किए जाते है।

ईर्ष्या, जलन, गुस्से और लोभ की भावनाएं कूट कूट के भर दी जाती है।

वो खुद अपने दुख से इतना दुखी नहीं होता जितना कि दूसरों के सुख में उसे दिक्कत महसूस होती है।

कभी प्यार के बदले प्यार बाँट कर को देखो, कितना सुकून मिलता है।

हर चीज़ नफ़ा और नुक़सान के तराजू में तोली नहीं जाती,

इंसान है तो इंसानियत को ज़िंदा रखने का फर्ज़ भी हमारा ही बनता है।

जिसकी जैसी भावना होती है, वो वैसा ही प्रतिबिम्ब दूसरों में देखता है।

अगर अच्छी सोच वाला है तो अच्छा और गर मन में मैल भरा है तो बुराई ही ढूँढता है।

©®दीपिका

वक़्त जो ठहर सा गया है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/27/waqt-jo-thahar-sa-gaya-hai/

वजह तुम हो!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/24/vajah-tum-ho/

सपनों की उड़ान!

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थमी नहीं है ज़िंदगी!

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सुकून की तलाश!

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नई सहर रोशनी वाली!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/21/nayi-sahar-roshani-vali/

वक़्त जो रुकता नहीं।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/20/waqt-jo-rukta-nahi/

प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

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और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

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बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

वक़्त जो ठहर सा गया है!

कुछ लम्हें ऐसे आते है ज़िंदगी में, जब वक़्त ठहर सा जाता है

सब कुछ फ़ीका फ़ीका और बैरंग सा लगने लग जाता है।

कोई भी खुशी चेहरे पर चमक नहीं लाती है,और एक छोटी सी चोट भी रुला के जाती है।

मन भरा भरा सा लगने लग जाता है,और अतिउत्साही रहने वाला मैं भी खुद को शांत सा पाता है।

सारी आरजुएं कुछ पल के लिए कहीं दफ़न सी हो जाती है,देह तो क्या रूह तक भी आँसू बहा जाती है।

लगता है कि वक़्त ठहर सा गया है, बिन बोले भी जैसे बहुत कुछ कह सा गया है।

अगर इस वक़्त में हम हिम्मत हार जाते है तो आधी क्या बिना कोशिश किए पूरी जंग ही हार जाते है।

ऐसे ही कुछ कमज़ोर पल हमें गलत रास्तों की तरफ धकेल देते है,

पर बाद में बस पछतावा रह जाता है क्यूँकि हम खुद अपनी खुशियों का रास्ता बंद कर लेते है।

सही फैसला, सही सोच परिस्थितियों का रुख़ बदल सकती है,

जानती हूँ इतना आसां नहीं होता, ये समझना पर कोशिश तो कर ही सकती हूं।

कुछ लम्हें ऐसे आते है ज़िंदगी में, जब वक़्त ठहर सा जाता है।

सब कुछ फ़ीका फ़ीका और बैरंग सा लगने लग जाता है।

©® दीपिका

वजह तुम हो!

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सपनों की उड़ान!

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सुकून की तलाश!

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वक़्त जो रुकता नहीं।

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माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

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मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

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गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

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वज़ह तुम हो!

कहो, होता है ना!

हर किसी के लिए वो एक महताब जरुर होता है,

जिसके होने का एहसास दिल के करीब और बहुत खास होता है।

पता ही नहीं चलता, कब बन जाता है वो वज़ह आपके जीने की,

मिलती है जिससे ताकत हिम्मत न खोने की।

पर कैसा लगता है जब वही साथी साथ छोड़ दे।

जिससे हो आपको ढेरों उम्मीदें वो ही आपका विश्वास तोड़ दे।

जब वो ही वज़ह बन जाएं आपकी मायूँसियों की,

आपकी गुमनामियों की, आपकी हैरानियों और परेशानियों की।

बस उसी वक़्त ये तय कर लेना कि कोई भी वज़ह आपकी जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती है।

जो देता है तकलीफ़, उससे वफ़ादारी की उम्मीद कैसे हो सकती है।

ऐसे किस्से को बुरा सपना समझ कर भुला देना चाहिये।

वो है नहीं क़ाबिल आपके और आपके विश्वास के, उसे तवज्जों देना बंद कर देना ।

©®दीपिका

सुकून की तलाश!

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नई सहर रोशनी वाली!

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वक़्त जो रुकता नहीं।

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गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

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सपनों की उड़ान!

सपनों की उड़ान!

मैंने कहीं सुना था, सपने देखना बहुत जरूरी होता है।

बंद आँखों से ना सही, खुली आँखों से ही सही।

मैंने भी देखा है एक सपना।

उड़ान भरने का मेरी ख़्वाहिशों के साथ।

हाँ, ये है मेरी सपनों की उड़ान!

जहाँ मेरी उत्सुकता, मेरी सीखने की इच्छा मुझे ले आई है इस उन्मुक्त गगन में।

जहाँ मैं और मेरे सपने, खुशी से हिचकोले खा रहे है।

नज़र रखे हुए अपनी तैयारियों पर,

आगे बढ़ने की संभावनाओं और पहरेदारियों पर।

अब जब कदम आगे बढ़ा ही दिया है तो रुकने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

चाहे आए कितनी भी मुश्किलें, पीछे मुड़ने का तो ख्याल ही पैदा नहीं होता।

मैंने कहीं सुना था, सपने देखना बहुत जरूरी होता है।

बंद आँखों से ना सही, खुली आँखों से ही सही।

मैंने भी देखा है एक सपना।

उड़ान भरने का मेरी ख़्वाहिशों के साथ।

©®दीपिका

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माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

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जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

थमी नहीं है ज़िंदगी!

सूखी मिट्टी में पानी की बूँद जैसी ज़िंदगी,

तपती गर्मी में ठंडी छाँव जैसी ज़िंदगी,

मुश्क़िलों से आँख मिचौली करती ज़िंदगी,

कभी हँसाती तो कभी रुलाती ज़िंदगी।

चाहे कुछ भी हो जाएं, हार ना मानती ज़िंदगी,

चलते रहिए, आगे बढ़िये!!

अभी थमी नहीं है ज़िंदगी।

आख़िरी सांस तक मौत से लड़ती ज़िंदगी।

अपनों को हौंसला दिलाती ज़िंदगी।

गिरते हुए को उठाती ज़िंदगी।

कभी भयानक तो कभी सबसे खूबसूरत रूप दिखाती ज़िंदगी।

चाहे कुछ भी हो जाएं, हार ना मानती ज़िंदगी,

चलते रहिए, आगे बढ़िये!!

अभी थमी नहीं है ज़िंदगी।

रोज नये पाठ पढ़ाती ज़िंदगी,

मुश्क़िलों को सुलझाती ज़िंदगी,

कभी गले लगाती तो कभी आंख दिखाती ज़िंदगी,

तो कभी अपना बनाकर पराये होने का अहसास करवाती ज़िंदगी।

चाहे कुछ भी हो जाएं, हार ना मानती ज़िंदगी,

चलते रहिए, आगे बढ़िए!!

अभी थमी नहीं है ज़िंदगी।

©® दीपिका

सुकून की तलाश!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/22/sukoon-ki-talash/

नई सहर रोशनी वाली!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/21/nayi-sahar-roshani-vali/

वक़्त जो रुकता नहीं।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/20/waqt-jo-rukta-nahi/

प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

सुकून की तलाश!

इस बड़ी सी दुनिया में अपने लिए एक छोटी सी जगह चाहती हूं।

जो दे दिल को सुकून और सपनों को दे उड़ान, वो ख़्वाब देखना चाहती हूं।

बहुत ज्यादा बड़ा ना सही, पर एक छोटा सा कोना सिर्फ अपने लिए चाहती हूँ।

जो खो ना जाएं भीड़ में, वो मुक़ाम खुद बनाना चाहती हूँ।

दिन भर की भाग दौड़ के बाद कुछ सुकून के पल अपने लिए भी चाहती हूं।

इस बड़ी सी दुनिया में, अपने लिए एक छोटी सी जगह चाहती हूं।

हो सकता है कि मेरी सुकून की परिभाषा कुछ और हो।

मेरा व्यक्त करने का तरीका और सलीक़ा औरों से अलग हो।

फिर भी चीरते हुए इस अंतर को मैं बराबरी के कुछ पल चाहती हूं।

इन ऊबड़ खाबड़ रस्तों पर कुछ सीधी साधी पगडंडी चाहती हूं।

दिन भर की भाग दौड़ के बाद कुछ सुकून के पल अपने लिए भी चाहती हूं।

इस बड़ी सी दुनिया में, अपनी एक छोटी सी जगह चाहती हूं।

जो दे दिल को सुकून और सपनों को दे उड़ान, वो ख़्वाब देखना चाहती हूं।

©® दीपिका

वक़्त जो रुकता नहीं।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/20/waqt-jo-rukta-nahi/

प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

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इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/