वज़ह तुम हो!

कहो, होता है ना!

हर किसी के लिए वो एक महताब जरुर होता है,

जिसके होने का एहसास दिल के करीब और बहुत खास होता है।

पता ही नहीं चलता, कब बन जाता है वो वज़ह आपके जीने की,

मिलती है जिससे ताकत हिम्मत न खोने की।

पर कैसा लगता है जब वही साथी साथ छोड़ दे।

जिससे हो आपको ढेरों उम्मीदें वो ही आपका विश्वास तोड़ दे।

जब वो ही वज़ह बन जाएं आपकी मायूँसियों की,

आपकी गुमनामियों की, आपकी हैरानियों और परेशानियों की।

बस उसी वक़्त ये तय कर लेना कि कोई भी वज़ह आपकी जिंदगी से बड़ी नहीं हो सकती है।

जो देता है तकलीफ़, उससे वफ़ादारी की उम्मीद कैसे हो सकती है।

ऐसे किस्से को बुरा सपना समझ कर भुला देना चाहिये।

वो है नहीं क़ाबिल आपके और आपके विश्वास के, उसे तवज्जों देना बंद कर देना ।

©®दीपिका

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25 thoughts on “वज़ह तुम हो!

  1. बहुत सुंदर एहसास बंधु👌

    कहते नहीं बनता ऐसा वो मंज़र लगता है,
    ज़ख्म जब बाहर नहीं, अंदर लगता है।

    Liked by 1 person

  2. Agree on there is nothing more valuable than the life, those who betrayed or breaks trust are not worthy enough to keep in our memory. another well-expressed line of-poetry.

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  3. मिलती है जिससे ताकत हिम्मत न खोने की।
    पर कैसा लगता है जब वही साथी साथ छोड़ दे।

    Kahi se koi jhoka hawa ka ayega aur tera na hone ka ehsaas fir se dila jayega. Aap ho woh jhoka hawa ka. Kya khoob likhi hai aap ne yeh kavita. Bahut pyara.

    Liked by 1 person

  4. प्रत्येक पँक्तियाँ बेहतरीन है।👌👌
    पता ही नहीं चलता, कब बन जाता है वो वज़ह आपके जीने की,
    मिलती है जिससे ताकत हिम्मत न खोने की।

    Liked by 1 person

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