नज़रिए का फेर!

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है,

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है।

किसी को सिर्फ कमियां तो किसी को उनसे बाहर निकलने का रास्ता नज़र आता है।

सही तो है,

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है।

ये उनका नज़रिया ही तो होता है जो हमें कभी अर्श पर तो कभी फर्श पर बिठाता है।

कभी उनकी आँखों का तारा तो कभी उनकी नज़रों से गिराता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है

जैसा हम सोचते है, वैसा ही हमारा नज़रिया बनता जाता है।

हमें पता भी नहीं चलता, कब दूसरे के लिए बोला हुआ एक एक गलत शब्द, हम पर ही भारी पड़ जाता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

©®दीपिका

मन की सुंदरता!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

पॉडकास्ट सुने।

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Zindagi-Ka-Safar-ecn9ig

32 thoughts on “नज़रिए का फेर!

  1. Sach kaha deepika, insan ka nazaria hi uski sabse badi pahchan hota hai..aur sahi nazariye se badi pareshani bhi aasani se hal ho jati hai. great write up.

    Liked by 1 person

  2. nazariya insane ko khud ki pehchaan bhi karata hai. kathinaiyon mein nazariya hi hamare bahut kaam aaa hai. tab nazariye ka keel hai. raat ke andhere me bhi aine wali subah ke sooraj ki kirano ki roshni ko dekhta hai..

    Liked by 1 person

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.