ऐ मन! तू अच्छा करता है।

ऐ मन! तू अच्छा करता है,

जो खुद रोकर अपने आँसू खुद ही पोंछ लेता है।

अच्छा करता है जो किसी भ्रम में नहीं जीता है,

अपने स्वाभिमान को तार तार नहीं होने देता है।

ऐ मन! तू अच्छा करता है।

कोई आएंगा और पोछेंगा आँसू मेरे, इस भुलावे में नहीं जीता है।

खुद गिरता है तो खुद उठने की भी ताकत रखता है।

खुद देता है खुद को संबल, और खुद ही अपनी राह चुनता है।

ऐ मन! तू अच्छा करता है।

दूसरे आएंगे तो मुमक़िन है कि सिर्फ़ तेरी गलतियाँ ही बताएंगे,

घाव पर मरहम लगाने की बात कहकर, जख्मों को ही कुरेद जाएंगे

बची हुई आस और हिम्मत पर भी प्रश्न चिन्ह लगाएंगे।

तेरे दामन में है कितने दाग, ये बार बार तुझको ही गिनवाएंगे।

फिर आएंगे कहकर, बीच राह में ही छोड़ जाएंगे।

तू समझाता रह जाएंगा खुद को और वो अपनी दुनिया में ही मस्त हो जाएंगे।

ऐ मन! तू अच्छा करता है,जो खुद रोकर अपने आँसू खुद ही पोंछ लेता है।

अच्छा करता है जो किसी भ्रम में नहीं जीता है,अपने स्वाभिमान को तार तार नहीं होने देता है।

©®दीपिका

यहाँ पढ़े।

“क़ाफी हूँ मैं”!!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/05/18/kafi-hu-mai/

यहाँ सुने।

“अभी थमी नहीं ज़िंदगी”!!

https://youtu.be/W9gegLb7TlU

नई सहर रोशनी वाली!

गमों के बादल छंट जाएँगे जब होगी नई सहर रोशनी वाली।

एक एक तिनके से बनेगा फिर से आशियाँ उम्मीदों वाला,

और एक नई डगर की तलाश होगी

हम भी चल देंगे साथ तुम्हारे, कुछ बेहतरी की आस में।

फिर से एक नई दुनिया, नई शुरुवात के लिए तैयार होगी।

अँधेरा कब तक रोकेगा उजाले की परवाज़ को

चिंता कब तक रोकेंगी उसके अगले आगाज़ को।

वो फिर उठेगा एक यौद्धा की तरह कर्मवीर बनकर,

फिर से वही रौनक बाज़ारों में लौटेगी।

गमों के बादल छंट जाएँगे जब होगी नई सहर रोशनी वाली।

एक एक तिनके से बनेगा फिर से आशियाँ उम्मीदों वाला,

और एक नई डगर की तलाश होगी।

बस तू धीरज न खो, हिम्मत न हार,

लगा रह अपनी कोशिशों में।

फिर से तेरी तक़दीर तेरी चौखट पर तेरा इंतज़ार कर रही होगी।

फिर से एक नई सहर नई ऊर्ज़ा के साथ तेरा दीदार कर रही होगी।

गमों के बादल छंट जाएँगे जब होगी नई सहर रोशनी वाली।

एक एक तिनके से बनेगा फिर से आशियाँ उम्मीदों वाला,

और एक नई डगर की तलाश होगी।

©® दीपिका

पॉडकास्ट सुने।

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Ulahana-Complaint-ed0l6t

वक़्त जो रुकता नहीं।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/20/waqt-jo-rukta-nahi/

प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

इंतज़ार अच्छे वक़्त का!

हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रहते जाते है,

कुछ पीछे छूट जाता है तो कुछ हम खुद छोड़ के आगे बढ़ जाते है।

ऐसा कर के कभी खुद को धोखा देते है,तो कभी किसी और से धोखा पाते है।

और फिर एक बार हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रह जाते है।

समय का पहिया गतिमान है किसी के लिए नहीं रुकता है,

हमें ही समझनी होती है उसकी गति और खुद ही सामंजस्य बिठाना पड़ता है।

गलती हमारी होती है और हम दूसरों पर दोष मढ़ते रह जाते है,

और हम फिर यूँ ही हाथ पर हाथ रखकर अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रह जाते है।

समय रहते ही चीजों को सुधारने की कोशिश की होती तो शायद नज़ारे कुछ और होते।

हमारे भी परिश्रम और सफलताओं के किस्से चहुँ ओर होते।

अच्छे वक़्त का इंतज़ार नहीं, अच्छा वक्त खुद के लिए कमाना पड़ता है।

खुद को हर उस हारी हुई सोच से ऊपर उठाकर जीत के क़ाबिल बनाना पड़ता है।

वरना हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रहते जाते है,

कुछ पीछे छूट जाता है तो कुछ हम खुद छोड़ के आगे बढ़ जाते है।

©®दीपिका

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!

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हज़ारों बहाने जीने के!

एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खुल ही जाता है।मुश्किलों की जड़ें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही आता है।

असफलता बंद नहीं कर सकती है द्वार सफलता के,

अगर हल खोजे जाएं तो हज़ारों बहाने निकल ही आएंगे खुल के जीने के।

कितना आसान होता है, हार मान कर बैठ जाना,

ये तो मुझसे होगा ही नहीं, ऐसा सोचकर जंग लड़ने से पहले ही हथियार डाल देना।

शायद एक कोशिश एक नई आशा का द्वार खोल सकती है,

जो कल तक था असंभव, उस पर विश्वास की एक नई कोंपल अंकुरित हो सकती है।

जरूरत है तो बस थोड़ा धैर्य रखने की,लगातार कोशिशें करने की,

हिम्मत नहीं हारने की,बिगड़ी बनाने की और अनसुलझी सुलझाने की।

एक छोटी सी हार से क्यूँ जिंदगी अपने मायने खो देती है?

क्या सस्ती है जान इतनी कि हर चौराहे पर बोली लगा करती है।

विश्वास रखो कि

एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खुल ही जाता है।मुश्किलों की जड़ें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही जाता है।

©® दीपिका

गमों के बादल!

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वो एक फ़रिश्ता!

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इंसानियत जो कुछ खो सी गई है।

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वो एक फ़रिश्ता!

क्या होती है परिभाषा एक फ़रिश्ते की?

आज की कविता इसी सवाल के नाम।

स्वागत करती हूँ आप सभी लोगों का एक बार फिर से “बातें कुछ अनकही सी” के अगले भाग में जहाँ आज खोज जारी है उस फ़रिश्ते की जिसे मैंने कल देखा था।

वो एक फ़रिश्ता!

कल देखा था मैंने एक फ़रिश्ता,

जो कि चिड़ियों को दाना चुगा रहा था,

प्यासों को पानी पिला रहा था और भूखों को खाना खिला रहा था।

चेहरे पर उसके तेज़ था जैसे कई सूरज मिलकर अपनी आभा बिखेर रहे हो।

अपने आशियानों से निकल कर किसी और का जीवन बदल रहे हो।

देखा तो लगा कि क्यूँ मैं भी ये नहीं कर सकती,किसी की आँखों का सपना और किसी की आत्मा को तृप्त क्यूँ नहीं कर सकती।

कल देखा था मैंने एक फ़रिश्ता,

जो कि चिड़ियों को दाना चुगा रहा था,

प्यासों को पानी पिला रहा था और भूखों को खाना खिला रहा था।

इससे बड़ी एक फ़रिश्ते की पहचान क्या हो सकती है!

जिसकी खुद की चादर फटी हो, जिसका खुद का पेट खाली हो,

पर ख़्वाहिश कितनों का तन ढ़कने की और उनका पेट भरने की हो।

तो सच में देव पुरुष है उपाधि का अधिकारी है।

कब कौन समझे तेरी भावनाओं को जो कहते तुझे कि अरे! ये तो खुद भिखारी है।

कल देखा था मैंने एक फ़रिश्ता,

जो कि चिड़ियों को दाना चुगा रहा था,प्यासों को पानी पिला रहा था और भूखों को खाना खिला रहा था।

©®दीपिका

इंसानियत जो कुछ खो सी गई है।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

पॉडकास्ट सुने।

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Koshishe-ecedbp

और भी दर्द है इस जमाने में।

चलिए आज बात करते है “बातें कुछ अनकही सी” में कुछ उस अनकहे दर्द के बारे में, जिसे कई बार हम समझ पाते है और कई बार जाने अनजाने अनसुना कर देते है अपनी ज़िंदगी की भाग दौड़ में।

और भी दर्द है इस ज़माने में

खुदगर्ज़ी की इन्तेहाँ तो देखो, वो दर्द भी दिए जाते है और “बेकसूर” भी कहलाते है,

क्या करे अपना दर्द बयां?

और भी दर्द है इस जमाने में, चलो किसी बंद दरवाजें को ताज़ी हवा के लिए खोल के आते है।

पैबंद तो कई है आज भी उसकी पोशाक पर,

पर नज़रों के वार उसके वजूद को तार तार किए जाते है।

और भी दर्द है इस जमाने में, चलो किसी बंद दरवाजें को ताज़ी हवा के लिए खोल के आते है।

बहुत बड़ी तादाद है अभी भी ऐसे लोगों की, जो कि सिर्फ अपने दर्द को सबसे बड़ा पाते है।

किसी की टूटी चारपाई और किसी की घिसी चप्पलें उनका “हाल ए दर्द” छुपा भी नहीं पाते है।

क्या कहे और क्या नहीं, इतना अंतर भी अपनी मासूमियत में समझ भी नहीं पाते है,

और भी दर्द है इस जमाने में, चलो किसी बंद दरवाजें को ताज़ी हवा के लिए खोल के आते है।

खुद गर्ज़ इतने भी ना बने कि खुदगर्ज़ी खुद शर्म के चोले में छुप जाए।

कोई भूखा, कोई बीमार सिर्फ़ मदद की आस में हाथ फैलाता ही रह जाए।

चलो कुछ कम करने की कोशिश करते है ऊँच नीच के फ़ासलें को और आधी आधी बाँट कर खाते है।

और भी दर्द है इस जमाने में, चलो बंद दरवाजों को ताज़ी हवा के लिए खोल के आते है।

©®दीपिका

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चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?
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https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/DuaayeBlessings-ec1mq3

चलो फिर से शुरू करते है!

स्वागत है आप सभी लोगों का, “बातें कुछ अनकही सी” के तीसरे भाग में, जहां हम बात करेगें, एक नई शुरूवात की, अपनी चाहतों और कोशिशों की, तो देर न करते हुए चलिए शुरू करते है।

इस बड़ी सी दुनिया में अपनी छोटी सी जगह चाहती हूं।

जो दे दिल को सुकून और सपनों को उड़ान, वो ख़्वाब देखना चाहती हूं।

बहुत ज्यादा बड़ा ना सही, पर एक छोटा सा कोना अपने लिए चाहती हूँ।

बड़ी बड़ी इमारतें ना सही, एक अपना सा घरौंदा अपने लिए चाहती हूं।

इस बड़ी सी दुनिया में अपनी छोटी सी जगह चाहती हूं।

चलो फिर से शुरू करते है!

जो दिल में दबा हुआ है उसे एक नया रूप दे देते है,

क्या हुआ जो पूरी नहीं हुई कोशिश आज, चलो फिर से शुरू करते है।।

एक बार में ही सफलता मिल जाये ये कोई जरूरी तो नहीं है,

कोशिश करना तो हमारे हाथ में ही है, किसी ने रोका थोड़े ही है।

चंद कोशिशों के बाद हर मान लेना हमारी जीत की संभावनाओं को हमसे दूर कर देते है।

क्या हुआ जो पूरी नहीं हुई कोशिश आज, चलो फिर से शुरू करते है।

चींटी बार बार कोशिश करके भी थकती नहीं है,

जंग आत्म बल से जीती जाती है, इसका एक बेमिसाल उदाहरण पेश करती है।

क्या हम खुद के लिए खुद चुनौती नहीं बन सकते है।

क्या हुआ जो पूरी नहीं हुई कोशिश आज, चलो फिर से शुरू करते है

मन के हारे हार और मन के जीत होती है,

कठिनाइयाँ रास्ता जरूर रोक सकती है पर अंतिम अवसर जरूर देती है।

अब ये हम पर है कि हम क्या फैसला लेते है?

क्या हुआ जो पूरी नहीं हुई कोशिश आज, चलो फिर से शुरू करते है।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/03/11/koshishe-2/

कविता सुनने के लिए यहाँ क्लिक करें।

https://anchor.fm/deepika-mishra

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बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?
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अजीब दास्तां है ये!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?

बिना मक़सद की ज़िंदगी के बारे में सोच कर देखिए?

क्या महसूस होगा? कैसा महसूस होगा?

चलिए आज बात करते है “बातें कुछ अनकही सी” के दूसरे भाग में, इसी बेमक़सद ज़िन्दगी के बारे में।

जिसके बारे में पता नहीं है, क्या कर रहे है और क्यूँ कर रहे है?

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?

बिना मक़सद की ज़िंदगी जैसे पिंजरे में बंद पंछी की सी, जी तो रहा है पर न कोई उमंग है और ना कोई उत्साह।

ना कोई लक्ष्य, ना लक्ष्य को पूरा करने की चाह।।

लक्ष्य होना बहुत जरूरी है जीने के लिए,

वो ज़मीन तैयार करने के लिए, उन सपनों में रंग भरने के लिए।।

मक़सद ना हो तो बेमानी हो जाता है हर साथ और हर संग।

और खूबसूरत ज़िंदगी भी हो जाती है बदसूरत और बदरंग।।

कैसे सिर्फ एक लक्ष्य ज़िन्दगी जीने का मक़सद बदल देता है।

दिन सिर्फ़ एक दिन नहीं रहता है, साथ में रहता है एक जुनून जो कि रातों को सोने नहीं देता है।

अगर इस दुनिया में आए है तो एक निमित्त सबका तय ही होता है, ऐसा मेरा मानना है।

हो सकता है आप कुछ अलग सोच रखते हो इस बारे में, ये तो सबका अपना सोचने का तरीका है।

क्यूँ गवाँ देना इस मौक़े को यूँ ही सोने, उठने में?

ज्यादा सोचने में और आधे खाली गिलास की चर्चा में?

तय करो कि इस दुनिया से जाते वक़्त कोई ख़्वाहिश अधूरी ना रह जाए।

मन खोया खोया से और दिमाग उलझा उलझा से ना रह जाए।

आशा करती हूँ कि आज की अनकही बातें आपको पसंद आई होगी। मैं मिलती हूँ कल फिर आपसे, तब तक के लिए अपना ध्यान रखिये।

स्वस्थ रहिये, घर पर ही रहिए।

©®दीपिका

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/01/12/lakhsya-jarur-banao/

सुनिये इस कविता को!

https://youtu.be/pXyI8JvVPHU

कल की पोस्ट यहाँ पढ़े।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/03/16/blogchatter-a2z-challenge-2020-theme-reveal/

आप मेरी अन्य कविताओं को यहाँ सुन भी सकते है,

https://anchor.fm/deepika-mishra

मिलिये मुझसे मेरी अभिव्यक्ति के माध्यम से

https://www.youtube.com/channel/UCSfQiXta_ihvHbOx16rRFKw

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Blogchatter A2Z challenge 2020 :Theme reveal

Hello All,

How are you all doing?

Blogchatter A2Z Challenge 2020: Theme reveal

I am participating again in the Blogchatter challenge 2020.

I have participated last year also that was my debut and I was pretty much unsure about my participation because it is a challenge of 26 days with Sunday off, I never did continuous writing of 26 days before so that was the thrilling experience for me.

Last year I was not sure about what was I going to write? I wrote daily, edited daily and published daily without a pre-preparation.

Can you believe?

When I completed, I felt a feeling of proud that I decided, modified but successfully completed the challenge in the end.

My Post collection 2019

You can check here:

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/04/11/blogchattera2z-challenge-my-posts/

This year I am coming with the theme of

Baate Kuch Ankahi Si“.

What are these talks? I can’t reveal now,

It’s a Suprise!

For now, I can only share, this is going to be in Hindi and in the form of poetries. Hoping for the best!

Check the link!

http://www.a-to-zchallenge.com/2020/03/?m=1

I am very excited and looking forward to the challenge.

You can also participate in this writing carnival.

For details, the link is here.

https://www.theblogchatter.com/the-road-runner-challenge-blogchattera2z-is-here/

Here are the event updates!

https://m.facebook.com/events/280869735882853/

Fill the form and submit for registration.

See you there on 1 April. Best wishes!

Regards & Gratitude,

Deepika

कोशिशें

साँसें चल रही है तो उम्मीद अभी भी बाकी है।
हारी नहीं हूँ मैं, कोशिश अभी भी जारी है।

माना कि मुश्किलों भरी है राह मेरी और तूफानों का दौर है,
पर ढिगा नहीं है विश्वास मेरा, जंग अभी भी जारी है।

फिर उठूँगी गिर कर भी मैं, लड़खड़ाते क़दमों से भी,
कोई हो ना हो साथ मेरे पर ज़िन्दगानी अभी भी बाकी है।

भले ही जल गई हो लकड़ियाँ मेरे चूल्हे की,
पर उनकी राख अभी भी बाकी है।

जख्म हरे कर जाते है कुछ घाव पुराने भी,
आँखों में नमी हो भले ही पर होठों पर मुस्कान अभी भी बाकी है।

©®दीपिका

सुनिये पॉडकास्ट पर!

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Umeed-Abhi-Bhi-Baki-Hai-ebf502