वो दस साल!

“अपने आप को पा लेना आसां नहीं होता,

सब कुछ पा लेने के बाद भी मन शांत क्यूँ नहीं होता?

क्यूँ भेद देते है उसके खुद के सवाल खुद को ही,

खुद अपने सवालों का जवाब बन पाना आसां नहीं होता।”

दस सालों का सफ़र

ये सफ़र है उस साधारण सी निम्न मध्यम परिवार की हरफनमौला लड़की का जिसका कद भले ही सामान्य हो पर ख़्वाब बहुत ऊँचे थे।

ये बात है 2009 की, जब वो अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही थी। पढ़ने में बहुत अच्छी थी इसलिये डिस्टिंक्शन से पास हुई थी। आगे बी.एड करने का विचार था। एंट्रेंस परीक्षा भी दे चुकी थी और जाहिर था कि सेलेक्ट भी हो ही चुकी थी बस कॉउंसलिंग बाकी थी। सब कुछ नार्मल सा ही चल रहा था उसकी जिंदगी में।

पर इसी बीच उसकी ज़िन्दगी में एक मोड़ आता है और 2010 में उसकी शादी हो जाती है। मिली जुली सी फीलिंग होती है उसकी, जहाँ एक तरफ़ बी.एड ना कर पाने का दुख था तो दूसरी तरफ़ ख़ुशी थी उसको अपने जीवनसाथी से मिलने की।

“नया सफ़र था ये, वो नई शुरुवात कर रही थी

कहीं गम था अपनों से बिछड़ने का तो वही नए अपनों का भी स्वागत कर रही थी।

पर वो अंजान थी इस नए सफ़र की चुनौतियों से, ये वक़्त था उसका असली ज़िन्दगी से मिलने का। अब तक जो अपनी छोटी बड़ी जरूरतों के लिए अपने मम्मी पापा पर आश्रित थी अब अचानक से उसकी भूमिका बदलने वाली थी। इसका अंदाज़ा तो था उसे पर गंभीरता का पता नहीं था।

एक नई जगह, एक नया शहर अब इंतज़ार कर रहा था उसका। पूरी गृहस्थी जमानी थी उसे।एक एक बर्तन, एक एक कोना सजाना था उसे अपने प्यार से। कर रही थी वो ये सब बड़े प्यार के साथ।

पर ये तो शुरुआत थी उसकी चुनौतियों भरे सफ़र की क्योंकि बहुत ही जल्दी फिर उसका किरदार बदलने वाला था, अभी तक जो एक पत्नी थी उसे माँ का दर्ज़ा मिलने वाला था। अभी तक जो अपनी पत्नी और बहु की जिम्मेदारियों को ही ठीक से समझ नहीं पाई थी वो जल्द ही माँ बनने वाली थी।

वह स्तब्ध थी अपनी ज़िंदगी में इतनी जल्दी जल्दी बदलते अपने किरदारों को लेकर। खुश भी थी और घबराई हुई भी कि क्या वो अभी तैयार है अपने जीवन में इतने बड़े बदलाव के लिए?

और शायद भगवान भी नहीं थे इसलिए दो महीनों के बाद उसका गर्भपात हो जाता है।

“टूट कर बिख़र जाना उसकी फितरत नहीं।

वो तो बंज़र ज़मीन पर भी चंद बूँदों की दुआ करती है।”

पर विधि का विधान देखिये वो फिर उम्मीद से होती है और 2011 में ही एक सुंदर सी बिटिया को जन्म देती है।

खुश थी वो पर बहुत से लोग खुश नहीं थे लड़की जो पैदा हुई थी। “आज भी हमारे समाज़ में लड़के का पैदा होना ज़्यादा जरूरी और खुशी का अवसर मन जाता है, लड़की के पैदा होने से”

जैसे तैसे वो अपने आप को इन परिस्थितियों में ढ़ालने की कोशिश करती थी लेकिन तब तक फिर एक नई चुनौती उसका इंतज़ार कर रही होती है इसी बीच उसके पति का ट्रांसफर हो जाता है और फिर वही चक्र एक बार फिर घूमता है।

एक नई जगह ,नया शहर, नए लोग फिर उसका इंतजार कर रहे होते है और नई चुनौतियाँ भी।कुछ दिनों बाद उसकी बेटी का पहला जन्म दिन होता है।वो बहुत खुश थी अपनी बेटी को अपनी आँखों के सामने बड़ा होते देख कर।

पर अचानक ही पहले जन्मदिन के कुछ दिन बाद ही उसकी बेटी गंभीर रूप से बीमार हो जाती है, जाँच से पता चलता है कि उसे निमोनिया है वह सिहर सी उठती है।

और वो पाँच दिन एक भयानक एहसास लेकर आते है उसके लिए। उसकी बेटी पाँच दिन अस्पताल में भर्ती रहती है,इलाज़ के लिए।

इतनी छोटी बच्ची को इतने दर्द से गुजरते देखना उसके लिए भी किसी यातना से कम नहीं था।ये दो साल वो सब कुछ भूल जाती है क्यूँकि हर बदलता मौसम उसकी बेटी को एक नई तकलीफ़ देकर जाता था और वो बस डॉक्टर और घर के बीच की दूरी ही तय करती रह जाती थी।

भले ही उसकी परिस्थितियाँ बदल गयी थी पर उसके अंदर की आस और आत्मविश्वास अभी भी जिंदा था। वो कुछ करना चाहती थी अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती थी आत्मनिर्भर बनना चाहती थी इसलिए जैसे ही उसकी बेटी स्कूल जाने के लायक हुई उसने भी 2013 में स्कूल में पढ़ाना शुरू कर दिया।

“आए कई इम्तिहान, तोड़ना भी बहुत चाहा,

मगर हम भी अड़ियल है जनाब!

फिर कभी आना कहकर, बाइज़्जत रुख़सत कर दिया।”

परिवर्तन चूँकि संसार का नियम है इसलिए चीज़ें तो फिर बदलने वाली ही थी, 2014 में फिर से उसके पति का ट्रांसफर हो जाता है और उसे स्कूल छोड़ना पड़ता है, ये निर्णय आसान नहीं होता है उसके लिए।

फिर से उन्हें एक नए शहर की तरह रुख करना पड़ता है। पर अब धीरे धीरे उनकी चुनौतियाँ बढ़ने लगी थी, वो शरीर से ही नहीं पर अब मन से भी थकने लगी थी पर समझ नहीं पा रही थी कि क्या करे?

“मुद्दतों से किसी ने अपने ख्वाबों को सोने नहीं दिया।

चाहे कितनी भी मुश्किलें आई पर उन्हें खुद पर हावी नहीं होने दिया”।।

एक और साल 2015 इसी उधेड़बुन में निकल जाता है उसकी बेटी अब थोड़ी और बड़ी हो गयी थी इसलिए वो फिर से अपनी टीचिंग शुरू करना चाहती थी पर कुछ जमता नहीं है उसे इस नई जगह पर।

“खुश रहना जिसकी आदत हो वो तो आंसुओं से भी अपनी प्यास बुझा लेता है।

हर चोट देने वाले को भी फिर एक बार गले से लगा लेता है।।”

वह अपने करियर के बारे में सोच ही रही होती है कि यही समय है अपने जीवन को एक नई दिशा देने के लिए कि 2016 में वो फिर से माँ बनती है। और अबकी बार एक नहीं दो दो बच्चों की ज़िम्मेदारी होती है उसके कंधों पर।

फिर 2 साल भूल गयी थी वो अपने बारे में सब कुछ। अपना लक्ष्य, अपना सपना कुछ याद नहीं आता था उसे और न ही इतनी ताक़त बची थी उसमें। उसके लिए उसके बच्चे ही अब उसकी ज़िन्दगी थे।

“पर जितना हम सोचते है उतना आसां नहीं होता है, अपने सपनों से पीछा छुड़ाना।

वो सोने नहीं देता है आपको और कोई राह न दिखे तो जीने भी नहीं देता है।

एक हँसती खेलती लड़की कब चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाती है उसे खुद भी पता नहीं चलता।वो खुद से लड़ने लग जाती है अपनी गलतियों के लिए। आत्म विश्वास बिखर सा जाता है उसका।

पर जो नहीं टूटती है वो है उसकी हिम्मत, उसका विश्वास। अब उसने सोच लिया था कि वो अपने सपनों को किसी भी हाल में मरने नहीं देगी।

अपने बेटे के 2 साल के होने के बाद 2018 में उसने अपने लिए उपलब्ध सभी सम्भावनाओं को टटोलने के बाद अपना रास्ता खुद बनाया। लेखन में अपनी रुचि को पहचानते हुए उसने लिखने का फैसला किया, किसी और के लिये नहीं, अपने लिए।

और वो आज आप सबके सामने है।

2019 का साल उसके लिए उपलब्धियों का साल था, बहुत कुछ पाया उसने, एक बार जो कदम आगे बढ़ाया उसने तो फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा। आज भी हर दिन एक नई चुनौती है पर वो हर दिन कुछ सीखने की चाह में निरंतर बिना रुके लगी हुई है।

“बिना मकसद के जीना भी कोई जीना है।

सिर्फ आना और चले जाना मेरा किरदार नहीं है।”

2020 की भी शुरुवात एक सकारात्मक उपलब्धि से हुई है।

कुछ पंक्तियाँ लिखी है अपने दस सालों के सफ़र पर।

ज़िंदगी दिखाती है कई रंग, जिस चश्मे से देखो, वो ही नज़र आता है।

कभी ठहर जाते है पल खुशी के तो कभी सब धुँधला नज़र आता है।।

दस सालों का है ये सफ़र मेरा, कोई अनचाहा ख़्वाब नहीं है।

खुद को खोजा है, पाया है मैंने, सुनिए जनाब ये कोई मज़ाक नहीं है।।

शुरू किया था सफ़र ये मैंने, एक अल्हड़ सी बेफिक्र लड़की से।

पता नहीं था तब मुझे कुछ, और लेती नहीं थी रिश्तों को भी गंभीरता से।।

खुश थी शायद वो, पर अंदर ही अंदर कुछ कचौट रहा था।

दूसरों से क्या गिला करे, ये तो खुद का खुद से ही अंतर्द्वंद्व चल रहा था।।

जब ढान लिया उसने तो सब कुछ इतना आसां सा लगने लगा था।

मन पंख लगा कर खुले आसमां में उन्मुक्त पंछी की तरह उड़ने लगा था।।

दीपिका
“This post is a part of ‘DECADE Blog Hop’ #DecadeHop organised by #RRxMM Rashi Roy and Manas Mukul. The Event is sponsored by Glo and co-sponsored byBeyond The Box, Wedding Clap, The Colaba Store and Sanity Daily in association with authors Piyusha Vir and Richa S Mukherjee”

156 thoughts on “वो दस साल!

  1. Your story resonated so much with mine. Before you settle down it’s time to move to a different city, new house new environment. I too started blogging for this reason so that it never goes back to dust. You have fought courageously with all odds of life to shine like a star.

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  2. The journey here is truly noteworthy. truly said एक हँसती खेलती लड़की कब चिड़चिड़ेपन का शिकार हो जाती है उसे खुद भी पता नहीं चलता! I ressonate so much with this!
    The poetry, the certificates continue to motivate you and keep you happy.

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  3. I have been following you since last year and have seen you grow beautifully in the field of blogging. I have always admired your writing, both in Hindi as well as English. Many congratulations on your last decade’s achievements. “पर जितना हम सोचते है उतना आसां नहीं होता है, अपने सपनों से पीछा छुड़ाना।

    वो सोने नहीं देता है आपको और कोई राह न दिखे तो जीने भी नहीं देता है।”
    I loved these lines, so true, dreams don’t let us sleep. I wish you all the luck and love for the new decade!

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    1. Thank you so much dear😊 for your kind words! Same here I also have been following you for a long time. Your journey is also incredible. We are here to learn and grow. Wish you the same Neha! Best wishes!

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  4. Bahut hi sunder…bahut hi umda… Kahani aur uske beech beech me apki kavitayein char chand laga deti hai is lekh me. Mere hisab se jindagi issi ka nam hai,…roj subah ek nayi khoj me nikalna…aur sham ko fir sab kuch bhul jana…Bas aise hi chamakate rahiye…Orange Flower ke liye Mubarakbad.

    #DecadeHop #RRxMM

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  5. Bilkul dil se likha hai aapne aur padh kar bahot acha laga. Khas baat ye hai ki itne struggles ke bawjood aapne itna kuch achieve kiya. Ye to bas shuruwaat hai. Am sure you’ll keep rising and shining bright. Aur haan, aaj jo log beti ke janm pe dukhi hai, beti ki aisi parvarish kare ki kal yehi log uspe garv kare. Loads of love to your daughter. Bahot acha laga aapne participate kiya hamare blog hop mein aur itna sundar post likha 🙂

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  6. “बिना मकसद के जीना भी कोई जीना है।

    सिर्फ आना और चले जाना मेरा किरदार नहीं है।”

    kya khoob likha hai. Sabse pehle to aanpik sachchyi ko salaam. jaha chans vaha raah..ye aap par puri tara se lago hota hai. Itani kathinaiyon k bavajood, himmat na haarna aur nirantar aage badhate rehna..isi ka naam zindagi hai…

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  7. Bahot hi achchi kavita likhi he apne, ek dam dilse nikli hui Avaj….itni utar chadhav ke bavjud apne lakshy nahi choda apna aur Tina achieve kiya….congratulations 👍

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  8. This story should be transform into a Kindle eBook. I mean this is so inspiring to start fresh every other day without failing. More power to you

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