तमन्ना ए दिल!

रोज़ की मसरूफ़ियत को नज़रअंदाज़ करना चाहता है, ये दिल।
कुछ पल फुर्सत के निकाल कर खुद को खुद से मिलवाना चाहता है, ये दिल।

मस्त परिंदे की तरह आसमां में उड़ने की तमन्ना रखता है, ये दिल।
हजारों ख्वाहिशों को बंद पलकों के तले ज़िन्दा रखता है, ये दिल।

कहीं बार व्यर्थ आशंकाओं से भी भर जाता है, ये दिल।
क्यूँ, कब, कैसे के भंवर में भी फँस जाता है, ये दिल।

सब कुछ पाने की चाहत में कहीं खुद को हार न दूँ, इस डर से भी रूबरू करवाता है ,ये दिल।
पर कैसे सपनों को मंजिल से मिलवाया जाता है, इसका रास्ता दिखाता है, ये दिल।

रोज़ की मसरूफ़ियत को नज़रअंदाज़ करना चाहता है, ये दिल।
कुछ पल फुर्सत के निकाल कर खुद को खुद से मिलवाना चाहता है, ये दिल।

©®दीपिका

छुट्टी वाला संडे?

उमा और निशा बचपन की सहेलियाँ थी, शादी के काफी सालों के बाद दोनों एक दूसरे से मिल रही थी।

चाय की चुस्की लेते हुए उमा ने निशा से पूछा “इस संडे का क्या प्लान है तुम्हारा”? फ्री हो तो मूवी के लिए चलते है?

निशा बात को टालते हुए बोली “नहीं यार, बिल्कुल टाइम नहीं है, बहुत बिजी हूँ।”

उमा सुनकर थोड़ा हैरान हुई, तू मना कर रही है और मूवी के लिए, विश्वास नहीं होता। एक टाइम था तू “फर्स्ट डे फर्स्ट शो” क्वीन के नाम से पूरे कॉलेज में फेमस थी।

“नहीं यार, मना कर दिया ना, नहीं हो पायेगा। क्यूँ बेवजह की ज़िद कर रही है?” निशा से झिड़कते हुए बोला।

“अरे निशा, कौनसा भैया को ऑफिस जाना होता है और बच्चों को स्कूल?” इतना टाइम तो निकाल ही सकती है तू अपने लिए। कौनसा पूरा दिन मांग रही हूँ तुझसे, 3 घंटे की ही तो बात है।

“तेरे लिए तीन घंटे होगें मेरे लिए तो 3 दिन का काम बढ़ जाएगा।”

“क्या हुआ निशा परेशान लग रही है,” उमा ने चाय का कप टेबल पर रखते हुए बोला।

“क्या बताऊँ यार, मेरे लिए हफ्ते के सातों दिन और साल के 365 दिन बराबर है। कोई “संडे”नहीं, कोई छुट्टी नहीं, उल्टा संडे को तो रोज की तुलना में दुगुना काम हो जाता है और कोई हाथ बंटाने वाला नहीं है।”

इतना कहकर निशा रुक सी गई और आँखों की नमी को छुपाने की कोशिश करने लगी।

उमा को समझने में देर नहीं लगी, उसने बात आगे बढाते हुए पूछा कि “क्यूँ उसकी कोई मदद नहीं करता?”

“तू भी ना एकदम झल्ली है, कौन मदद करेगा मेरी?”, मम्मीजी तो अक्सर बीमार ही रहती है, वो तो एक कप चाय भी बनाकर नहीं पीती अपने आप से।ठीक हो तो भी और कुछ परेशानी हो तो बात की अलग है। इनका तो पूरा दिन ही आफिस में निकल जाता है और बचा कौन बच्चे। उनकी उम्र थोड़े ही मदद करवाने की।”

“मैं तो तरस गयी हूँ एक अदद संडे के लिए, किसी को कोई फ़र्क भी नहीं पड़ता कि मुझे भी अपना संडे चाहिए, जब मैं भी देर तक सो सकूँ, सबका मनपसंद नाश्ता और खाना बनाने से छुट्टी मिल सके। मैं भी देर तक बैठकर अपना मनपसंद प्रोग्राम एन्जॉय कर सकूँ।

उमा ने निशा का हाथ अपने हाथ में लिया और समझाते हुए बोली कि “इसमें जितनी गलती उन लोगों की है उससे ज्यादा तुम्हारी है।अपने हक़ की आवाज़ तुम्हें खुद उठानी चाहिए।”

“सबका ख्याल रखना अच्छी बात है पर अपने बारे में सोचना भी उतना ही जरुरी है। सबको ये एहसास करवाना कि तुम सब कुछ कर सकती हो और तुम्हें किसी की मदद नहीं चाहिए, ये भी गलत है।”उमा बोली।

उन्हें भी ये पता लगना चाहिए कि सारी जिम्मेदारियाँ अकेले उठाना कोई मज़ाक बात नहीं है। अगर तुम नहीं बोलती हो तो भी उनका फर्ज़ बनता है कि आगे बढ़ कर पूँछे। उमा लगातार बोले जा रही थी और निशा सुन्न होकर उसकी बातें सुनती ही रही।

उमा तूने तो मेरी आँखें खोल दी कैसे शुक्रिया करूँ मेरी दोस्त,आँसू पोंछती हुई निशा बोली। आज ही मैं सबसे बात करती हूँ और हाँ अगले संडे के लिए टिकट बुक करके रखना, मैं जरुर आऊँगी।

निशा के चेहरे पर मुस्कान थी और उमा अपनी दोस्त को मुस्कुराते हुए देख कर मानों सातवें आसमां पर थी।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/12/03/sunday-ki-talaash/

कैसी लगी कहानी, कमेंट बॉक्स में लिखकर जरुर बताए।

©®दीपिका

Watch “Deepika Mishra” on YouTube

Good Morning Everyone!

How are you all?

I hope, you are doing good.

Thank you so much guys for all your love and support.

Keep showing the same. These are the blessings for me.

One announcement!

Now you can listen to my poems and watch many more related activities on my Youtube channel.

Link is here.

https://www.youtube.com/channel/UCSfQiXta_ihvHbOx16rRFKw

You can subscribe too for further updates!

Thanks again!

Regards & Gratitude,

Deepika

ज़िंदगी तो जिंदादिली से जीने का नाम है।

ज़िंदगी तो जिंदादिली से जीने का नाम है।
सपनों को पीछे छोड़कर जीना कोई ज़िंदगी थोड़े ही है, समझौता है।

अगर आता है हुनर जीने का तो क्या फ़र्क पड़ता है कि कौन बड़ा और कौन छोटा है?

अच्छाई का हमेशा बाँहें फैलाकर स्वागत करो।
और लगे अगर जकड़े हो किसी बुराई से तो उसे स्वीकार कर, बदलने की कोशिश करो।

तुरंत फल की चाहत में कर्मों का लेखा ज़ोखा बिगाड़ना सबसे बड़ी बेवकूफी है।

अगर की है शिद्दत से मेहनत तो फल जरुर मिलेगा,खुद पर विश्वास रखना बेहद जरुरी है।

ज़िंदगी तो जिंदादिली से जीने का नाम है।

©® दीपिका

खुद की सुनो।

अजीब दस्तूर है दुनिया का!

कुछ न करो तो “निकम्मा”
और करो तो “खुदगर्ज़” कहती है।

बेफिक्र होकर जियो तो “लापरवाह”
और कदम फूँक फूँक कर रखो तो “डरपोक” कहती है।

ज्यादा खर्च करो तो “दिखावा”
और बज़ट के अनुसार चलो तो “कंजूस” कहती है।

दूसरों के कहे अनुसार जीने लगे तो शायद ही आगे बढ़ पायेगें,
दिल में दबे अरमान और कुछ करने का जूनून यूँ ही घुट घुट कर दम तोड़ जायेगें।

ज़िंदगी जीनी है तो “जिंदादिली” से जिओ।
“कुछ तो लोग कहेगें ही, लोगों को कहने दो” की सोच को जहन में जिन्दा रखो।

©®दीपिका

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Khud-Ki-Suno-ec65ti

Happy Diwali 2019

Wishing you all a very happy, healthy and prosperous Diwali!

I know, I am late but it’s never too late to wish to our close ones. And you all are my family too.

May God bless you all with good health and with fortune!

Eat sweets, be happy but take care of your health too.

Lots of lots of good wishes for all the upcoming opportunities.

May the festival fill your life with great joy, happiness and satisfaction!

Regards,

Deepika

https://youtu.be/nuDxZXdByEU

जंग जीवन की

Hello friends,

Life is a journey and we live this in phases. We have to face up and downs at various points. What I think about life, my feelings are here in the form of Hindi poem. I hope you like it.

Hindi Poetry

Jang Jeevan Ki ( जंग जीवन की)

साँसें चल रही है तो उम्मीद अभी भी बाकी है।
हारी नहीं हूँ मैं, कोशिश अभी भी जारी है।

माना कि मुश्किलों भरी है राह मेरी,
पर ढिगा नहीं है विश्वास मेरा, जंग अभी भी जारी है।

फिर उठूँगी गिर कर भी मैं, लड़खड़ाते क़दमों से भी,
कोई हो ना हो साथ मेरे पर ज़िन्दगानी अभी भी बाकी है।

भले ही जल गई हो लकड़ियाँ मेरे चूल्हे की,
पर उनकी राख अभी भी बाकी है।

जख्म हरे कर जाते है कुछ घाव पुराने भी,
आँखों में नमी हो भले ही पर होठों पर मुस्कान अभी भी बाकी है।

You can also read here.

Zindagi ka Safar”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/06/06/zindagi-ka-safar/

Vajood Jindagi ka”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/05/30/vajood-jindagi-ka/

What does Independence mean for me? Happy Independence Day!

Hello Friends!

Today we are celebrating our 73rd Independence Day.

May our nation bloom with prosperity and peace and a good state of mind!

Happy Independence Day to all of you!

For me, Independence is a state of mind where we can feel free to think, speak, write and express the thoughts without any hesitation and without any fear of judging by others.

What does Independence mean for me?

Sorry for being biased but here I will talk about the woman perspective, my personal beliefs. The reason is very simple, I can relate more with the situations and the circumstances which she has to face?

What I feel-

I don’t know will you agree or not, a woman in Indian society don’t feel absolute freedom in her whole life. Exceptions are there but I am talking about the majority.

When a girl born in a family. Things do start with the very first day. Maximum doesn’t feel that excitement when a male child born.

I personally saw the examples. I am quoting the words, “Oh! Ladki Hui hai”!(Oh! The girl child is born, Bless You)

When a boy born, you can feel the difference. Moments are celebrated as an occasion in most of the families.

I wonder, what is her fault?

Next, she has less freedom to express what she feels about her future and her plans to live her life.

On the contrary, boys have much more rights to explore their way of freedom.

Before marriage, her life is decided by her parents and after her marriage, the command shifted to some other hands.

It is never too easy to achieve her imagined life in reality. Most of the time she has to fight for her elementary rights.

Here I am not blaming anyone, not accusing the society, I am sharing the things which should be changed and it is changing to some extent but lots of work should be done in the process.

Things which I feel should change in Indian society for girls freedom-

1. Change the mindset-

We have to change our mindset. Girls are not liabilities. They are the most beautiful and sensitive souls who know to do sacrifices without a second thought in their minds.

2. Don’t try to rule and overpower her-

She is also a free individual with her own world of imaginations and desires. Please try to understand her perspective too. Don’t try to misunderstand her capabilities with lots of if and buts.

3. Try to respect her perspective towards her life-

She has also her choices. She doesn’t want to be a shadow of someone else. Please show some respect to what she believes and what she wants to achieve in her life.

4. Treat her as an individual, not as a daughter, wife and a mother.

I agree she plays a various role at the same time. Please value what she does. If she is staying at home and takes care of her family then she is doing the biggest job and if she is working then how smartly she is managing both the roles, we should salute the efforts.

5. She is not a liability, she is an asset-

How God cherish a girl with precious emotions. She has immense patience, the power of forgiveness, the art of adjustment. I feel a girl is the source of the positive energy, love and care for her family. How can she be a liability? She is an asset.

6. Don’t misunderstand her sacrifices with her weakness-

She is the strongest human being that’s why nature gives her the power to born a new life. She nurtures a seed into a strong tree, how can we evaluate the sacrifices in the journey of motherhood into words? We can’t.

All I want to say that in our society women does not feel freedom at various extents. A Boy has a liberty to do whatever he wants to do, nobody question and if they do, he does not care about that but the other side a girl has to fight for the same rights.

Is this freedom of girls we talk about?

What do you feel about this? Tell me in the comment section.

Till then take care and be independent.

Regards and gratitude,

Deepika

200 Followers!!

Hello Friends,

This is a gratitude post to all the lovely people out there who followed my blog.

Thank you so much guys for motivating me with your lovely comments and suggestions.

I am heartily thankful to each and every member to be a part of my blogging journey.

From the last 2 or 3 months, I am experimenting a lot with my content. Are you liking this?

If you have any suggestions regarding my blog content, you are welcomed.

“Life is a journey full of adventures, Try to fill with pleasures, forget sorrows.”

#deepikawrites

Regards & Gratitude,

Deepika