जिंदगी तेरे रूप अनेक….

कभी देखा है जिंदगी को गौर से, कितनी समझ में आएंगी ये भी सबकी समझ के ऊपर ही निर्भर करता है।
जितने लोग, उतने नज़रिए, जितनी सोच, उतनी बातें। सही भी है, पांचों ऊंगलियां कब बराबर होती है और होनी भी नहीं चाहिए।

कभी हमारे नज़रिए से कुछ सही होता है तो कभी हम दूसरों के नज़रिए को समझ नहीं पाते, कभी उसी बात को हँसी में टाल देते है तो कभी उसी पर रूठ जाते है।कुल मिलाकर बस अपने अहम को पोषित करते रहते है।

शायद कभी अपने मैं से बाहर निकल ही नहीं पाते ,जो हमारे अहम को स्वीकार करता है वो सही और जो नहीं, वो गलत बन जाता है, दूसरे को अपनी जगह पर रख कर सोच पाने में हम आज भी सक्षम नहीं है।

शायद रिश्तों का मायाजाल है ये सब, जिसके मोह में हम कहीं उलझ कर रह जाते है, किसे छोड़े, कहाँ जाएँ, कुछ पता नहीं…जब तक मसरूफ़ियत रहती है तब तो ठीक है, वरना खाली मन तो ना जाने कहाँ तक टहल आता है।

ज़िंदगी को जिताना है।

जब भी सुनती हूँ किसी आकस्मिक निधन के बारे में, जिसका ताल्लुक आत्महत्या से होता है तो मन में ढेरों सवाल कौंध जाते है।

सवाल बदलते परिवेश के बारे में, सवाल जो कि मुझे अन्दर तक झकझोर जाते है।

मन सिहर उठता है उन भावनायों के बारे में सोचकर कि क्यूँ किसी ने ऐसा फैसला लिया होगा?

क्यूँ आइडियल ज़िंदगी की परिभाषा को धता बता कर अपना जीवन खत्म कर लिया होगा।

शायद उसे विश्वास हो चलता है कि उसके रहने ना रहने से कोई फर्क नहीं पड़ता।

या खुद को वो और घुटता हुआ नहीं देख सकता।

एक कमज़ोर पल उससे क्या से क्या करवा जाता है?

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अगर थोड़ी सी हिम्मत दिखाता इस मुश्किल घड़ी में तो शायद खुद को अपनों के बीच में खड़ा पाता।

हम कोई नहीं है किसी की निजी ज़िंदगी में झांकने वाले।

पर अगर बाँट कर दुख कम हो सकता है तो क्यूँ नहीं,हम भी नहीं पीछे हटने वाले।

सवाल उठता है।

क्यूँ हार जाती है ज़िंदगी, मौत की बाहों में?
सब कुछ पाकर भी क्यूँ खो जाती है अंजानी राहों में?

शायद बात कर पाना उसके लिए बहुत मुश्किल होता होगा।
सूझती होगी ना कोई सूरत ना सीरत, हर जख्म दर्द देता होगा।

इंसानी रिश्तों से बढ़कर कुछ नहीं होता।
गर बाँटा होता दर्द उसका भी तो शायद आज वो भी ज़िन्दा होता।

क्यूँ भूल जाते है, बंद किवाड़ों के पीछे भी एक कहानी होती है।
अगर आती सुकून भरी हवा खिड़कियों से तो शायद कुछ और रवानी होती।

बस यही गुजारिश

“हो सके तो हर एक जिंदगी के लिए जीने की कोशिश करे।

हारे खुद को ना, उस गलत सोच को ही हरा दे।”

©®दीपिका

यहाँ देखिये

“रुक जाना नहीं तू कभी हार के”

https://youtu.be/1xWrKHE7dAA

तमन्ना ए दिल!

रोज़ की मसरूफ़ियत को नज़रअंदाज़ करना चाहता है, ये दिल।
कुछ पल फुर्सत के निकाल कर खुद को खुद से मिलवाना चाहता है, ये दिल।

मस्त परिंदे की तरह आसमां में उड़ने की तमन्ना रखता है, ये दिल।
हजारों ख्वाहिशों को बंद पलकों के तले ज़िन्दा रखता है, ये दिल।

कहीं बार व्यर्थ आशंकाओं से भी भर जाता है, ये दिल।
क्यूँ, कब, कैसे के भंवर में भी फँस जाता है, ये दिल।

सब कुछ पाने की चाहत में कहीं खुद को हार न दूँ, इस डर से भी रूबरू करवाता है ,ये दिल।
पर कैसे सपनों को मंजिल से मिलवाया जाता है, इसका रास्ता दिखाता है, ये दिल।

रोज़ की मसरूफ़ियत को नज़रअंदाज़ करना चाहता है, ये दिल।
कुछ पल फुर्सत के निकाल कर खुद को खुद से मिलवाना चाहता है, ये दिल।

©®दीपिका

Motivational Quotes:#Deepthoughts Quote2

Hello Friends,

This is day 2 and I am here with another quote in the series of Motivational quotes named Deep thoughts.Thank you so much for yesterday response.

Motivational Quotes

Deep thoughts Quote2

If you are short with the resources. Concentrate more to strengthen your skills. Believe me, Resources will come to fill the space.”

#deepikawrites

You are also welcomed with your thoughts in the comment section.

#Day1 #Quote1 #Deepthoughts

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/07/30/motivational-quotes-deepthoughts/

Regards & Gratitude

Deepika