Hi…I am back Again!!!

Hello All…

I am back again…🙋‍♀️🙋‍♀️

I hope you all are doing good.

I was not active from the last couple of days…And I was missing my writing routine.

I was busy to incorporate this new normal routine in our daily life where lots of new changes have taken a very important place in our life. Covid has changed so many things. And I believe I will never forget this year 2020.

But because this is the end of this year 2020…I am hoping the best for the upcoming next year.

Just finger crossed and hoping for such great and positive news for the year 2021.

One thing more thank you so much for your love and support even when I was not writing. I saw daily visitors are coming and dropping messages. Sorry for all the late replies.

I just want to tell you…

Stay safe and take care of your mental and physical health first.

We will be meeting soon.

Regards,

Deepika

नई खुशियों के द्वार

नई खुशियों के द्वार…

जब खुद को समझाना मुश्किल लगने लगे, जब हर अपना बेगाना लगने लगे,

जब हर बात दिल को दुःखाने लगे, जब आंखें भी सबसे नज़रें चुराने लगे।

तो समझ लेना कि मन घावों से भर गया है, ना चाहते हुए भी मन में कुछ गढ़ सा गया है।

ये समय है खुद को नकारात्मक विचारों से दूर करने का,जो घट चुका है उसे भुलाकर आगे बढ़ने का।

क्योंकि जब तक हम उन्हीं बातों में उलझे रहेंगे,अपने उत्साह को पल पल खोते रहेंगे।

जरूरी नहीं कि एक बार जो गलत हुआ है, वो बार बार ही अपने आप को दोहराएगा,जो हो रहा है उसमें छिपा हो सकता है कोई मक़सद जिसका आभास आपको भविष्य ही करवाएंगा।

अपनी खुशियों की चाबी अपने हाथ में ही रखिये,दूसरों को मत दीजिये, ये समझना भी अब जरूरी हो जाता है,

कब तक भटकते रहोगे आप गम के अंधेरों में, खुद को एक मौका देना भी नई खुशियों के द्वार खोल जाता है।।

©®दीपिका मिश्रा

जब मैं थक जाया करती हूँ…

जब मैं थक जाया करती हूँ तो खुद को समझाया करती हूँ कि कोई बात नहीं,

थोड़ा सुस्ता ले…

थम जा थोड़ा और अब तक के जिए पलों के थोड़ा हिसाब लगा ले।

कोई हर्ज़ नहीं है थोड़ा गुणा भाग करने में,

क्या खोया, क्या पाया इस जद्दोजहद की जांच करने में।

जब मैं थक जाया करती हूँ तो खुद को समझाया करती हूँ,

सारी जिम्मेदारियों के बोझ तले कुछ पल सुकूँ के अपने लिए चुराया करती हूँ।

जहाँ ना बंदिश होती है ख्यालों पर और ना ही किसी सोच का पहरा होता है,

आज़ादी होती है खुद से मिलने की, उन चंद मिनटों का वक़्त भी कितना सुनहरा होता है।

जहाँ मैं खुद से मिला करती हूँ, खुद से गिला करती हूँ,

रखती हूँ लेखा जोखा अपने सपनों का, अपने अरमानों का,

जो पूरे हुए उनका और जो छूट गए उनके हर्ज़ानों का।

जब मैं थक जाया करती हूँ तो खुद को समझाया करती हूँ कि कोई बात नहीं, थोड़ा सुस्ता ले…

थम जा थोड़ा और अब तक के जिए पलों के थोड़ा हिसाब लगा ले।

अगर लगे कि सब बराबर है तो फिर तो कोई गम ही नहीं,

पर गर लगे कि मामला गड़बड़ है और स्थिति काबू में नहीं है तो रास्ता बदलने में भी देर नहीं लगाती हूँ।

जब मैं थक जाया करती हूँ तो खुद को समझाया करती हूँ।

~~दीपिका मिश्रा

https://youtu.be/CMELPt4vzGM

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बातें कुछ अनकही सी..

Baate kuch ankahi si..

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/07/15/baate-kuch-ankahi-si/

पॉडकास्ट सुने… जिओ दिल से!!

Podcast… Jio Dil Se

https://anchor.fm/deepika-mishra

नई कविता

New poem…

वक़्त जो ठहर से गया है

https://youtu.be/UHUGbFsx_6k
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Regards & Gratitude,

Deepika Mishra

बातें कुछ अनकही सी! भावनाओं का तूफान।

बातें कुछ अनकही सी ,जहाँ शब्द नहीं भावनाएँ बोलती है।चलिए मेरे साथ इस सफ़र पर!

चलो जीरो से शुरू करते है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/30/phir-kare-zero-se-shuruvaat/

भावनाओं का एक्स रे!!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/28/bhavanayo-ka-xray/

वक़्त जो ठहर सा गया है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/27/waqt-jo-thahar-sa-gaya-hai/

यादों की बारात!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/29/yaadon-ki-baarat/

वजह तुम हो!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/24/vajah-tum-ho/

सपनों की उड़ान!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/24/sapno-ki-udaan/

थमी नहीं है ज़िंदगी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/22/thami-nahi-hai-zindagi/

सुकून की तलाश!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/22/sukoon-ki-talash/

नई सहर रोशनी वाली!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/21/nayi-sahar-roshani-vali/

वक़्त जो रुकता नहीं।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/20/waqt-jo-rukta-nahi/

प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

उम्मीदों वाली राह!

एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खुल सकता है।मुश्किलें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही सकता है।

असफलता बंद नहीं कर सकती, द्वार सफलता के,

अगर खोजे जाएं तो निकल आएंगे हज़ारों बहानें जीने के।

आसां लगता है हमें हार मान कर बैठ जाना।

ये तो मुझसे होगा ही नहीं, ये सोच कर जंग लड़ने से पहले हथियार डाल देना।

शायद एक छोटी सी कोशिश एक नई आशा का द्वार खोल सकती है।

जो कल तक लगता था तुझे असंभव, वही आस की मिट्टी एक नई कोंपल अंकुरित कर सकती है।

एक रास्ता बंद हो तो कोशिश करने से दूसरा खुल सकता है।

मुश्किलें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही सकता है।

~~©®दीपिका

https://youtu.be/RxJQiVYn8NU

ऐ मन! तू अच्छा करता है।

ऐ मन! तू अच्छा करता है,

जो खुद रोकर अपने आँसू खुद ही पोंछ लेता है।

अच्छा करता है जो किसी भ्रम में नहीं जीता है,

अपने स्वाभिमान को तार तार नहीं होने देता है।

ऐ मन! तू अच्छा करता है।

कोई आएंगा और पोछेंगा आँसू मेरे, इस भुलावे में नहीं जीता है।

खुद गिरता है तो खुद उठने की भी ताकत रखता है।

खुद देता है खुद को संबल, और खुद ही अपनी राह चुनता है।

ऐ मन! तू अच्छा करता है।

दूसरे आएंगे तो मुमक़िन है कि सिर्फ़ तेरी गलतियाँ ही बताएंगे,

घाव पर मरहम लगाने की बात कहकर, जख्मों को ही कुरेद जाएंगे

बची हुई आस और हिम्मत पर भी प्रश्न चिन्ह लगाएंगे।

तेरे दामन में है कितने दाग, ये बार बार तुझको ही गिनवाएंगे।

फिर आएंगे कहकर, बीच राह में ही छोड़ जाएंगे।

तू समझाता रह जाएंगा खुद को और वो अपनी दुनिया में ही मस्त हो जाएंगे।

ऐ मन! तू अच्छा करता है,जो खुद रोकर अपने आँसू खुद ही पोंछ लेता है।

अच्छा करता है जो किसी भ्रम में नहीं जीता है,अपने स्वाभिमान को तार तार नहीं होने देता है।

©®दीपिका

यहाँ पढ़े।

“क़ाफी हूँ मैं”!!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/05/18/kafi-hu-mai/

यहाँ सुने।

“अभी थमी नहीं ज़िंदगी”!!

https://youtu.be/W9gegLb7TlU

अहमियत


समझाना जितना जरूरी है, उतना समझना भी।बोलना जितना जरूरी है उतना सुनना भी।

बस यूँ ही कल्पनाओं के संसार में जिया नहीं जा सकता है। और बस यूँ ही एकतरफ़ा इन राहों पर चला नहीं जा सकता है।

शिकायतों के काँटों के बीच कुछ मुस्कराते फूल भी होने चाहिए।

किसी में कैसे हो सकती है सिर्फ कमियाँ ही, ये भी तो समझना चाहिए।

गर दे नहीं सकते साथ किसी का तो, बस सुन ही लो उसकी पुकार, यारों!

अँधेरोंमें भटकने के बाद दुबारा रोशनी पाने का उसका भी है अधिकार, यारों!

बोलना जितना जरूरी है उतना सुनना भी।

समझाना जितना जरूरी है उतना समझना भी।

~~दीपिका

कविता सुनने के लिए यहाँ क्लिक करे।

https://youtu.be/FvsmhObVUH8

काफ़ी हूँ मैं!!

लोग उठाते है सवाल मेरी शख्सियत पर,
मेरे होने पर और कुछ खोने पर।

मेरे कुछ करने पर या थम कर सुस्ताने पर,
आगे बढ़ने पर और पीछे मुड़ के ना देखने पर।

मेरे हँसने पर या घंटों रोने पर, मेरे फैसलों पर और मेरी कबिलियत पर।

मेरे सपनों पर या हकीक़त से रुबरु होने पर, मेरी मंशाओं पर और होने वाली शंकाओं पर।

पर वो भूल जाते है कि मैं आज की नारी हूँ,
खुद ही खुद के लिए काफी हूँ।

हाँ, फर्क़ नहीं पड़ता मुझे अब जमाने की बेड़ियों से,
खुले आसमां में पंख फैलाकर उड़ना सीख चुकी हूं मैं।

खुद का और अपने जैसे अनगिनत का हौंसला बढ़ाती हूँ मैं।
मुश्किलों से घबराती नहीं हूँ मैं, खुद ही खुद के लिए काफी हूँ मैं।

खुद ही खुद के लिए काफी हूँ मैं

©®दीपिका

नज़रिए का फेर!

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है,

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है।

किसी को सिर्फ कमियां तो किसी को उनसे बाहर निकलने का रास्ता नज़र आता है।

सही तो है,

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है।

ये उनका नज़रिया ही तो होता है जो हमें कभी अर्श पर तो कभी फर्श पर बिठाता है।

कभी उनकी आँखों का तारा तो कभी उनकी नज़रों से गिराता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है

जैसा हम सोचते है, वैसा ही हमारा नज़रिया बनता जाता है।

हमें पता भी नहीं चलता, कब दूसरे के लिए बोला हुआ एक एक गलत शब्द, हम पर ही भारी पड़ जाता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

©®दीपिका

मन की सुंदरता!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

पॉडकास्ट सुने।

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Zindagi-Ka-Safar-ecn9ig

लम्हे जो बीत गए है!

लम्हे जो बीत गए है, अब वापस कभी नहीं आएँगे।

चाहे अब उन्हें कितनी भी शिद्द्त से, फिर उनसे न मिल पाएँगे।

इसलिए कहते है कि आज में जिओ,

ये पल यादें ना बन जाएं, इन्हें संजोते चलो।

क्योंकि

लम्हे जो बीत गए है, अब वापस कभी नहीं आएँगे।

चाहे अब उन्हें कितनी भी शिद्द्त से, फिर उनसे न मिल पाएँगे।

जो भी करना चाहते हो, इसी पल में करो, इसी पल को जिओ,

कल कर लेंगे, कल कर लेंगे, इस आदत से बचो।

क्योंकि

कल क्या होगा, ये किसको पता?

कल की फ़िक्र में क्यूँ करे अपना आज लापता

बाद में तो पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता,

क्यूँ जिए छलावे में जब आज हाथ में है शफ़ा।

क्योंकि

लम्हे जो बीत गए है, अब वापस कभी नहीं आएँगे।

चाहे अब उन्हें कितनी भी शिद्द्त से, फिर उनसे न मिल पाएँगे।

©®दीपिका

बीते कल की परछाई!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

पॉडकास्ट सुनें।

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Zindagi-Ka-Safar-ecn9ig