ज़िंदगी का मोल

मुद्दतें बीत जाती है ये सोचने में कि ज़िंदगी तेरा मोल क्या है?

यूँ ही बेवज़ह खो देते है हम वो अनमोल पल जिसमें सारा संसार बसा है।

क्यूँ है हम पाबंदियों के मोहताज़ तेरे अक़्स से रुबरु होने के लिए?

ये तो सबसे अच्छा मौका है, खुद को साबित करने का कि कैसे जिया जाता है इंसानियत के लिए।

हमारी एक छोटी सी सावधानी, लाखों ज़िन्दगियों को सुरक्षित कर सकती है।

घर पर रहिए, सजग रहिए और जागरूक रहिए,अभी यही सबसे बड़ी राष्ट्र सेवा हो सकती है।

नोट– इस समय सबको अभी ज़िम्मेदारी और भागीदारी को समझना चाहिए।

©®दीपिका