चमक उसके स्वाभिमान की…

कौन कहता है कि ये सच नहीं, वो करती सब है, पर सबको जँचती नहीं।

सारा माहौल संभालती है पर अपने अंदर का माहौल बिगड़ने के भय से कभी बचती नहीं।

वो लड़ती रहती है रोज़ अपने अंदर की कशमकश से,

अपने बारे में सोचे या करे समझौता हर छोटे बड़े किस्से से।

आसां नहीं होता अपने आप को उन चीज़ों के लिए मना लेना,

स्वच्छंद उड़ने वाले पंछी को एक छोटे से पिंजरे में कैद कर देना।

अपनी परवाज़ को वो एक ऊँचाई देना चाहती है,

पर अपने स्वाभिमान के साथ समझौता उसे कतई पसंद नहीं है।

इसी तरह चलते चलते वो काफ़ी सफ़र तय कर लेती है,

आते जाते दो राहों पर भी वो मंज़िल नहीं वो खोती है।

उसके भीतर की टोह लेना इतना भी आसान नहीं होता,

वो सिर्फ़ एक औरत नहीं, एक पूरा संसार उसके आँचल में है बसता।

~~दीपिकामिश्रा

नई खुशियों के द्वार

नई खुशियों के द्वार…

जब खुद को समझाना मुश्किल लगने लगे, जब हर अपना बेगाना लगने लगे,

जब हर बात दिल को दुःखाने लगे, जब आंखें भी सबसे नज़रें चुराने लगे।

तो समझ लेना कि मन घावों से भर गया है, ना चाहते हुए भी मन में कुछ गढ़ सा गया है।

ये समय है खुद को नकारात्मक विचारों से दूर करने का,जो घट चुका है उसे भुलाकर आगे बढ़ने का।

क्योंकि जब तक हम उन्हीं बातों में उलझे रहेंगे,अपने उत्साह को पल पल खोते रहेंगे।

जरूरी नहीं कि एक बार जो गलत हुआ है, वो बार बार ही अपने आप को दोहराएगा,जो हो रहा है उसमें छिपा हो सकता है कोई मक़सद जिसका आभास आपको भविष्य ही करवाएंगा।

अपनी खुशियों की चाबी अपने हाथ में ही रखिये,दूसरों को मत दीजिये, ये समझना भी अब जरूरी हो जाता है,

कब तक भटकते रहोगे आप गम के अंधेरों में, खुद को एक मौका देना भी नई खुशियों के द्वार खोल जाता है।।

©®दीपिका मिश्रा

वक़्त का मोल

हर किसी के पास उतना ही वक़्त होता है,

समय का पहिया भी सबके लिए बराबर ही घूमता है,

और यहाँ तक कि सूरज का निकलना और अस्त होना भी सबके लिए एक समान ही होता है।

जब प्रकृति ने ही भेदभाव नहीं किया हमारे साथ, तो हम कैसे कर सकते है?

क्यूँ खुद को कम आँक कर खुद से ही धोखा कर सकते है?

क़ाबिल है सभी, बस अपनी क्षमताएँ पहचानने में देर कर देते है।

जो समझ जाते है अपनी अहमियत, वो फिर कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखते है।

वो फिर कभी पीछे मुड़ के नहीं देखते है।

~~दीपिका

काफ़ी हूँ मैं!!

लोग उठाते है सवाल मेरी शख्सियत पर,
मेरे होने पर और कुछ खोने पर।

मेरे कुछ करने पर या थम कर सुस्ताने पर,
आगे बढ़ने पर और पीछे मुड़ के ना देखने पर।

मेरे हँसने पर या घंटों रोने पर, मेरे फैसलों पर और मेरी कबिलियत पर।

मेरे सपनों पर या हकीक़त से रुबरु होने पर, मेरी मंशाओं पर और होने वाली शंकाओं पर।

पर वो भूल जाते है कि मैं आज की नारी हूँ,
खुद ही खुद के लिए काफी हूँ।

हाँ, फर्क़ नहीं पड़ता मुझे अब जमाने की बेड़ियों से,
खुले आसमां में पंख फैलाकर उड़ना सीख चुकी हूं मैं।

खुद का और अपने जैसे अनगिनत का हौंसला बढ़ाती हूँ मैं।
मुश्किलों से घबराती नहीं हूँ मैं, खुद ही खुद के लिए काफी हूँ मैं।

खुद ही खुद के लिए काफी हूँ मैं

©®दीपिका

फिर करे ज़ीरो से शुरुआत!

चलो फिर से ज़ीरो से शुरू करते है।

जो छूट गया वो छूट गया, चलो फिर अपनी चाह को आशाओं से भरते है।

क्या हुआ जो बहुत कुछ पीछे छूट गया है,

क्या हुआ जो सब पहले जैसा नहीं है।

हम फिर से शुरू करते है,

सारी आशंकाओं को भूल कर के फिर से खुद को नई ऊर्जा से भरते है।

ऐसी कोई भी मुश्किल नहीं होती जिसका कोई हल नहीं होता।

हार और जीत तो बस दिमाग़ में होती है, हारते तभी है जब कोशिशों में दम नहीं होता।

काम करने के सही तरीके को जानना बेहद जरूरी होता है।

सिर्फ़ कोरी मेहनत करने से मनचाहा फल नहीं मिलता है।

मेहनत के साथ साथ अपना उत्साह भी जोड़ना पड़ता है।

तभी कोई काम ठीक से मुक्कमल होता है।

क्या हुआ जो सब बिखर गया है? फिर से समेट लेते है।

चलो फिर ज़ीरो से शुरू करते है

यादों की बारात!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/29/yaadon-ki-baarat/

भावनाओं का एक्स रे!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/28/bhavanayo-ka-xray/

वक़्त जो ठहर सा गया है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/27/waqt-jo-thahar-sa-gaya-hai/

वजह तुम हो!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/24/vajah-tum-ho/

सपनों की उड़ान!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/24/sapno-ki-udaan/

थमी नहीं है ज़िंदगी!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/22/thami-nahi-hai-zindagi/

सुकून की तलाश!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/22/sukoon-ki-talash/

नई सहर रोशनी वाली!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/21/nayi-sahar-roshani-vali/

वक़्त जो रुकता नहीं।

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/20/waqt-jo-rukta-nahi/

प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

यादों की बारात!

यादें कुछ खूबसूरत सी तो कुछ बदरंग यादें।

जहन में जिंदा रहती है बनकर कभी सबक़ तो कभी खुशनुमा सौगातें।

हर बीता पल एक याद बन जाता है,

चाहे तो भी वो वक़्त बदला नहीं जाता है।

यादें एक ख़ूबसूरत गुलदस्ते की तरह भी होती है,

जिसमें अलग अलग रंग के फूल अपनी खुशबू बिखेरते है।

कुछ जहन में बस जाते है,

तो कुछ को हम सिर्फ भूल जाना चाहते है।

यादें गवाह होती है हमारी शुरुआत की,

हमारे आगाज़ की तो हमारे अंज़ाम की।

हमारे परवाज़ की और हमारी ढ़लान की।

कुछ बुलंदियों की और उनकी चुनौंतियों की।

ऐसे ही चलता रहता है कारवाँ भूली बिसरी यादों का,

कुछ बेहद खूबसूरत तो कुछ बैरंग बातों का।

होती है!

यादें कुछ खूबसूरत सी तो कुछ बदरंग यादें।

जहन में जिंदा रहती है बनकर कभी सबक़ तो कभी खुशनुमा सौगातें।

©® दीपिका

भावनाओं का एक्स रे!

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वक़्त जो ठहर सा गया है!

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वजह तुम हो!

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सपनों की उड़ान!

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थमी नहीं है ज़िंदगी!

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सुकून की तलाश!

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नई सहर रोशनी वाली!

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वक़्त जो रुकता नहीं।

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बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

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भावनाओं का एक्स रे!

“जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी”

रामचरितमानस की ये पंक्तियाँ अपने आप में सम्पूर्ण है , भावनाओं की परख की समझ पैदा करने के लिए।

भावनाओं का एक्स रे!

जिसकी जैसी भावना होती है, वो वैसा ही प्रतिबिम्ब दूसरों में देखता है।

अगर अच्छी सोच वाला है तो अच्छा और गर मन में मैल भरा है तो बुराई ही ढूँढता है।

जिसकी जैसी भावना होती है, वो वैसा ही प्रतिबिम्ब दूसरों में देखता है।

इतना भी मुश्किल नहीं होता ये पता लगाना कि मन में क्या चल रहा है?

सीधी राह चुनी है या मन में कोई चोर पल रहा है।शख्सियत को तोलने के तराजू पहले से तैयार कर लिये जाते है।

“अरे”…! “बेचारा,” “इसके बस का तो कुछ नहीं” के जुमले मन को तार तार किए जाते है।

ईर्ष्या, जलन, गुस्से और लोभ की भावनाएं कूट कूट के भर दी जाती है।

वो खुद अपने दुख से इतना दुखी नहीं होता जितना कि दूसरों के सुख में उसे दिक्कत महसूस होती है।

कभी प्यार के बदले प्यार बाँट कर को देखो, कितना सुकून मिलता है।

हर चीज़ नफ़ा और नुक़सान के तराजू में तोली नहीं जाती,

इंसान है तो इंसानियत को ज़िंदा रखने का फर्ज़ भी हमारा ही बनता है।

जिसकी जैसी भावना होती है, वो वैसा ही प्रतिबिम्ब दूसरों में देखता है।

अगर अच्छी सोच वाला है तो अच्छा और गर मन में मैल भरा है तो बुराई ही ढूँढता है।

©®दीपिका

वक़्त जो ठहर सा गया है!

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वजह तुम हो!

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सपनों की उड़ान!

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थमी नहीं है ज़िंदगी!

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सुकून की तलाश!

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नई सहर रोशनी वाली!

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वक़्त जो रुकता नहीं।

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प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

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मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

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और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

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सपनों की उड़ान!

सपनों की उड़ान!

मैंने कहीं सुना था, सपने देखना बहुत जरूरी होता है।

बंद आँखों से ना सही, खुली आँखों से ही सही।

मैंने भी देखा है एक सपना।

उड़ान भरने का मेरी ख़्वाहिशों के साथ।

हाँ, ये है मेरी सपनों की उड़ान!

जहाँ मेरी उत्सुकता, मेरी सीखने की इच्छा मुझे ले आई है इस उन्मुक्त गगन में।

जहाँ मैं और मेरे सपने, खुशी से हिचकोले खा रहे है।

नज़र रखे हुए अपनी तैयारियों पर,

आगे बढ़ने की संभावनाओं और पहरेदारियों पर।

अब जब कदम आगे बढ़ा ही दिया है तो रुकने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता।

चाहे आए कितनी भी मुश्किलें, पीछे मुड़ने का तो ख्याल ही पैदा नहीं होता।

मैंने कहीं सुना था, सपने देखना बहुत जरूरी होता है।

बंद आँखों से ना सही, खुली आँखों से ही सही।

मैंने भी देखा है एक सपना।

उड़ान भरने का मेरी ख़्वाहिशों के साथ।

©®दीपिका

सुकून की तलाश!

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नई सहर रोशनी वाली!

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वक़्त जो रुकता नहीं।

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प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

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अजीब दास्तां है ये!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

सुकून की तलाश!

इस बड़ी सी दुनिया में अपने लिए एक छोटी सी जगह चाहती हूं।

जो दे दिल को सुकून और सपनों को दे उड़ान, वो ख़्वाब देखना चाहती हूं।

बहुत ज्यादा बड़ा ना सही, पर एक छोटा सा कोना सिर्फ अपने लिए चाहती हूँ।

जो खो ना जाएं भीड़ में, वो मुक़ाम खुद बनाना चाहती हूँ।

दिन भर की भाग दौड़ के बाद कुछ सुकून के पल अपने लिए भी चाहती हूं।

इस बड़ी सी दुनिया में, अपने लिए एक छोटी सी जगह चाहती हूं।

हो सकता है कि मेरी सुकून की परिभाषा कुछ और हो।

मेरा व्यक्त करने का तरीका और सलीक़ा औरों से अलग हो।

फिर भी चीरते हुए इस अंतर को मैं बराबरी के कुछ पल चाहती हूं।

इन ऊबड़ खाबड़ रस्तों पर कुछ सीधी साधी पगडंडी चाहती हूं।

दिन भर की भाग दौड़ के बाद कुछ सुकून के पल अपने लिए भी चाहती हूं।

इस बड़ी सी दुनिया में, अपनी एक छोटी सी जगह चाहती हूं।

जो दे दिल को सुकून और सपनों को दे उड़ान, वो ख़्वाब देखना चाहती हूं।

©® दीपिका

वक़्त जो रुकता नहीं।

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प्यार की ताक़त!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/18/pyar-ki-taakat/

माँ की जादूगरी!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/17/maa-ki-jaadugari/

नज़रिये का फेर!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/16/nazariye-ka-pher/

मन की सुंदरता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/15/man-ki-sundarta/

लम्हे जो बीत गए है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/14/lamhe-jo-beet-gaye-hai/

बीते कल की परछाई!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/13/beete-kal-ki-parchaai/

जंग दिल और दिमाग की!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

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गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

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बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

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नज़रिए का फेर!

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है,

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है।

किसी को सिर्फ कमियां तो किसी को उनसे बाहर निकलने का रास्ता नज़र आता है।

सही तो है,

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है।

ये उनका नज़रिया ही तो होता है जो हमें कभी अर्श पर तो कभी फर्श पर बिठाता है।

कभी उनकी आँखों का तारा तो कभी उनकी नज़रों से गिराता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है

जैसा हम सोचते है, वैसा ही हमारा नज़रिया बनता जाता है।

हमें पता भी नहीं चलता, कब दूसरे के लिए बोला हुआ एक एक गलत शब्द, हम पर ही भारी पड़ जाता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

©®दीपिका

मन की सुंदरता!

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लम्हे जो बीत गए है।

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बीते कल की परछाई!

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जंग दिल और दिमाग की!

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हज़ारों बहाने है जीने के!

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गमों के बादल!

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वो एक फ़रिश्ता!

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इंसानियत कुछ खो सी गई है!

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और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/bemaksad-jina-bhi-koi-jina-hai/

अजीब दास्तां है ये!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/01/ajeeb-dastaan-hai-ye/

पॉडकास्ट सुने।

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Zindagi-Ka-Safar-ecn9ig