माँ: एक फ़रिश्ता

शब्दों का जादू उसे खूब चलाना आता है,
वो माँ है, उसे सब पता चल जाता है।

मेरी आवाज से भाँप जाती है वो मेरे दर्द की गहराई को,
क्यूँ माँ? सच है ना,आप जान जाती हो, मेरी हर अनकही सच्चाई को

शब्द कम पड़ जाते है,जब भी लिखने बैठती हूँ आप के बारे में,
अब समझ पाती हूँ माँ, आपकी हर डांट के पीछे छिपी हुई भलाई को।

कहना चाहती हूँ बहुत कुछ, दिल में छुपा हुआ है।
आप का हाथ सिर पर हमेशा बना रहे बस, रब से इतनी सी दुआ है।

ऊपर भगवान और नीचे आपका कोई मोल नहीं है।

कौन पिरो सकता है माँ की ममता को शब्दों में, मेरे लिए तो ये सबसे पवित्र और अनमोल है।

आपकी हर सीख अब याद आती है माँ,हैरान हूँ तब इसे क्यूँ झुठलाती थी मैं माँ।

अजीब विडम्बना है, समय लगता है समझने में,बाद में तो सबसे अच्छी दोस्त बन जाती है माँ।

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जंग जीवन की

Hello friends,

Life is a journey and we live this in phases. We have to face up and downs at various points. What I think about life, my feelings are here in the form of Hindi poem. I hope you like it.

Hindi Poetry

Jang Jeevan Ki ( जंग जीवन की)

साँसें चल रही है तो उम्मीद अभी भी बाकी है।
हारी नहीं हूँ मैं, कोशिश अभी भी जारी है।

माना कि मुश्किलों भरी है राह मेरी,
पर ढिगा नहीं है विश्वास मेरा, जंग अभी भी जारी है।

फिर उठूँगी गिर कर भी मैं, लड़खड़ाते क़दमों से भी,
कोई हो ना हो साथ मेरे पर ज़िन्दगानी अभी भी बाकी है।

भले ही जल गई हो लकड़ियाँ मेरे चूल्हे की,
पर उनकी राख अभी भी बाकी है।

जख्म हरे कर जाते है कुछ घाव पुराने भी,
आँखों में नमी हो भले ही पर होठों पर मुस्कान अभी भी बाकी है।

You can also read here.

Zindagi ka Safar”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/06/06/zindagi-ka-safar/

Vajood Jindagi ka”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/05/30/vajood-jindagi-ka/

Friends and Friendship: Poetry Expression!

Hello Friends!

I know, I am posting it late but I believe every day is a right day to express your feelings towards your loved ones.

Belated Happy Friendship Day to all my lovely friends in the community.

Thanks for supporting me always and guiding me with the valuable suggestions.

Here is today’s poem dedicated to friends and friendship.

“एक पाती दोस्ती के नाम”!

दोस्त बनाए नहीं जाते बन जाते है,
खुद बखुद रिश्तों के तार जुड़ जाते है।

दोस्त तेरी दोस्ती ने खुशकिस्मत बना दिया।
जो सजदा कहीं न मिला वो तेरी आँखों ने बयां किया।

तू मुझ से ज्यादा मुझ पर भरोसा दिखाता है।
ऐ दोस्त! बता ना, तुझे मुझमें ऐसा क्या नज़र आता है?

कहीं बार गिर कर उठा हूँ मैं तेरा सहारा लेकर,
ख़ुदा का बंदा है तू! भूल जाता है खुद दुआएँ देकर।

दुआ है बस, तेरा मेरा साथ यूँ ही बना रहे।
भले ही अलग हो जाए राहें, पर मंज़िलें आकर मिला करे।

You can also listen to the poem here.

https://youtu.be/B6K6362NCaM

For English readers, I am not translating this one yet expressing the same feeling. I hope you like it.

Some friends are really like a support system.

Never ditch you either in the worst situations.

They are very clear about their friendship goals.

Always ready to help their friend in each up and downs.

This gesture of my friend fills me with gratitude.

You are an awesome personality with a lovely attitude.

#deepikawrites

You can also read one of my Hindi poem on friendship. Here is the link.

“Dost Teri Dosti”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/07/02/dost-teri-dosti/

I hope you will like the poem. Thanks for reading.

Stay tuned.

Regards and Gratitude,

Deepika

दुआएँ

अकेले आए थे, अकेले ही चले जाना है।

कुछ जाएगा साथ नहीं हमारे,

बस मीठे बोल और अच्छे कर्मों को पीछे रह जाना है।

पता नहीं क्यूँ भागते रहते है हम पूरी ज़िंदगी, कुछ चंद टुकड़ों के पीछे।

एक दिन सबको यही इसी मिट्टी में ही मिल जाना है।

मीठी बोली, प्यार और अपनापन धरोहर है इंसानियत की,

कुछ ज्यादा खर्च नहीं होता अगर बाँटे हम दुख दूसरों के भी।

हमारी एक पहल से शायद किसी का दिन बन जाये,

किसी रोते हुए को ख़ुशी और सुकून के दो पल मिल जाए।

यही ज़िंदगी है, एक दूसरे का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ चले।

कुछ अपनी कहे, कुछ सुने दूसरों की भी और यूँ ही सफ़र तय करते चले।

पैसों से भी अनमोल है ये दुआएँ,

अगर हो सके तो इनसे भी झोली भरते जाए।

वरना क्या बचता है इस ज़िन्दगी में?

अकेले आये थे,अकेले ही चले जाना है।

Regards and Gratitude!

Deepika

You can also listen to the poem. Here is the link.

https://youtu.be/j0cbn7qYkUM

You can read another Hindi poem here.”Dost Teri Dosti”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/07/02/dost-teri-dosti/

उम्मीद

ना जाने क्यूँ आज सब कुछ धुआँ धुआँ सा लग रहा है।

अश्क दरियां सी और मन सागर सा भरा लग रहा है।

ऐसा नहीं है कि हम जानते नहीं उन्हें,

पर फिर भी न जाने क्यूँ उनके सजदे में ये सिर झुक रहा है?

सोच की गहराइयों पर भी उनका कब्ज़ा है,

ख्याबों की उड़ान पर भी कोई अनदेखा पहरा है।

फिर भी सब जानते हुए भी ये दिल गुस्ताख़ी कर रहा है।

बदल जायेगे वो हर पल ये इबादत कर रहा है।

इसी उम्मीद में कि शायद एक दिन वो समझ जायेगें,

और इस वीराने में भी उम्मीदों के फूल अपनी खुशबू फैलायेगे।