Maybe she is good for nothing for others…

Maybe she is good for nothing for others…

But how can she ignore it???

Damn!! It is her self respect.No matter what others think.

Now it is high time…she must listen to her inner voice,

Others must understand that she too can have her own choice.

Why do they question her personality and integrity?

Are they even worthy enough to blot her dignity?

When they harass her with an abusive tone and rough voice,

How then does she accept this, after all, isn’t it a matter of her pride!

Gradually she also starts accepting what others think about her.

She doesn’t even feel like facing her favourite mirror.

She doesn’t understand what is going wrong with her.

How can she be the reason for every problem?

It is high time, she understands that she too own a unique place in between those thousand personalities,

She can also think about her future and life, despite fulfilling her duties.

Maybe she is good for nothing for others….

~~Deepika Mishra

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Deepika Mishra

Motivational Blogger & Writer

बीते कल की परछाई!

बीते कल की परछाई!

लोग कहते है कि बीते कल में जिया नहीं करते,

हाथों से रेत फिसल जाने के बाद मुट्ठी मला नहीं करते।

पर बीते कल की परछाईयाँ आपका पीछा कहाँ छोड़ती है?

कितना भी भूलने की कोशिश करो, कहीं न कहीं जहन में जिंदा रहती है।

कभी हिम्मत तो कभी उदासी देती है,

कभी कुछ नाज़ुक पल की यादें तो कभी आगे बढ़ने की नसीहत देती है।

बहुत कुछ सीखते है हम बीते कल की परछाइयों से,

कुछ की गई गलतियों से तो कुछ उन्हें ना दोहराने की कोशिश में खुद से की गई लड़ाईयों से।

इतना भी आसां नहीं होता, अतीत से पीछा छुड़ा लेना,

पर मिलता क्या है याद करने से, ये भी एक गंभीर बहस का मुद्दा है।

अगर अच्छाई लेकर आगे बढ़ रहे है, तो फिर भी ठीक है,

पर गर “रंजिश ए गम” पाल रखा है तो बहुत मुश्किल है।

जल्द से जल्द बाहर निकलना होगा इन परछाइयों से,

बीते दिनों की मायूँसियों से और तन्हाईयों से।

सच है कि बीते कल में जिया नहीं करते।

हाथों में से रेत फिसल जाने के बाद मुट्ठी मला नहीं करते।

©®दीपिका

दिल और दिमाग़ की जंग!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/11/jang-dil-aur-dimag-ki/

इंतज़ार अच्छे वक़्त का!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/10/intezaar-acche-waqt-ka/

हज़ारों बहाने जीने के!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

जंग दिल और दिमाग की!

ये जंग है दिल और दिमाग की, देखते है कि आखिर कौन जीतता है?

दिल और दिमाग के बीच कुछ मुद्दों को लेकर फर्क़ साफ़ साफ़ दिखाई देता है।

दिल बड़ी साफ़ गोही से सब कुछ कह देना चाहता है,

पर ये दिमाग है ना, बड़ा शातिर है, गोल गोल घुमाते रहना चाहता है।

लोग कहते है कि दिल से लिए फैसले अक्सर सही नहीं होते,

जो उठाते है फ़ायदा आपकी भावनाओं का, वो कतई विश्वास करने लायक नहीं होते।

कुछ ऐसे भी होते है जो हर चीज़ को दिमाग के तराजू से तोलते है,

अगर लगता है फायदे का सौदा तो ही किसी रिश्ते में आगे बढ़ते है।

ये जंग है दिल और दिमाग की, देखते है कि आखिर कौन जीतता है?

दिल और दिमाग के बीच कुछ मुद्दों को लेकर फर्क़ साफ़ साफ़ दिखता है।

मेरी नज़र में रिश्ते दिल से निभाए जाते है, ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत होती नहीं है।

गर महसूस कर सकते हो तकलीफ़ उसकी भी तो यही सच्ची कसौटी है।

कुछ रिश्तों को वक़्त के हवाले कर देना ही समझदारी होती है।

अगर अपने है तो लौट कर आएंगे वरना इंतज़ार करते करना एक मज़बूरी बन जाती है।

ये जंग है दिल और दिमाग की, देखते है कि आखिर कौन जीतता है?

दिल और दिमाग के बीच कुछ मुद्दों को लेकर फर्क़ साफ़ साफ़ दिखता है।

©® दीपिका

इंतज़ार अच्छे वक़्त का!

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हज़ारों बहाने जीने के!

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इंतज़ार अच्छे वक़्त का!

हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रहते जाते है,

कुछ पीछे छूट जाता है तो कुछ हम खुद छोड़ के आगे बढ़ जाते है।

ऐसा कर के कभी खुद को धोखा देते है,तो कभी किसी और से धोखा पाते है।

और फिर एक बार हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रह जाते है।

समय का पहिया गतिमान है किसी के लिए नहीं रुकता है,

हमें ही समझनी होती है उसकी गति और खुद ही सामंजस्य बिठाना पड़ता है।

गलती हमारी होती है और हम दूसरों पर दोष मढ़ते रह जाते है,

और हम फिर यूँ ही हाथ पर हाथ रखकर अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रह जाते है।

समय रहते ही चीजों को सुधारने की कोशिश की होती तो शायद नज़ारे कुछ और होते।

हमारे भी परिश्रम और सफलताओं के किस्से चहुँ ओर होते।

अच्छे वक़्त का इंतज़ार नहीं, अच्छा वक्त खुद के लिए कमाना पड़ता है।

खुद को हर उस हारी हुई सोच से ऊपर उठाकर जीत के क़ाबिल बनाना पड़ता है।

वरना हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रहते जाते है,

कुछ पीछे छूट जाता है तो कुछ हम खुद छोड़ के आगे बढ़ जाते है।

©®दीपिका

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/insaaniyat-jo-kuch-kho-si-gayi-hai/

पॉडकास्ट सुने।

https://anchor.fm/deepika-mishra

हज़ारों बहाने जीने के!

एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खुल ही जाता है।मुश्किलों की जड़ें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही आता है।

असफलता बंद नहीं कर सकती है द्वार सफलता के,

अगर हल खोजे जाएं तो हज़ारों बहाने निकल ही आएंगे खुल के जीने के।

कितना आसान होता है, हार मान कर बैठ जाना,

ये तो मुझसे होगा ही नहीं, ऐसा सोचकर जंग लड़ने से पहले ही हथियार डाल देना।

शायद एक कोशिश एक नई आशा का द्वार खोल सकती है,

जो कल तक था असंभव, उस पर विश्वास की एक नई कोंपल अंकुरित हो सकती है।

जरूरत है तो बस थोड़ा धैर्य रखने की,लगातार कोशिशें करने की,

हिम्मत नहीं हारने की,बिगड़ी बनाने की और अनसुलझी सुलझाने की।

एक छोटी सी हार से क्यूँ जिंदगी अपने मायने खो देती है?

क्या सस्ती है जान इतनी कि हर चौराहे पर बोली लगा करती है।

विश्वास रखो कि

एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खुल ही जाता है।मुश्किलों की जड़ें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही जाता है।

©® दीपिका

गमों के बादल!

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वो एक फ़रिश्ता!

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इंसानियत जो कुछ खो सी गई है।

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तन्हाईयाँ

भरी भीड़ में भी जो तन्हाईयाँ ढूंढ़ता है, वो मेरा अक़्स ही तो है जो एक मनपसंद आईना ढूंढ़ता है।

शायद उसको आदत हो गई है खुद ही कहकर खुद ही सुनने की,पर फिर भी हर दूसरे पल आहट पर बंद दरवाजा खोलता है।

भरी भीड़ में भी जो तन्हाईयाँ ढूंढ़ता है, वो मेरा अक़्स ही तो है जो एक मनपसंद आईना ढूंढ़ता है।

वो क्या समझेगा गुमनामी को उसकी?जो खुद गुमशुदा होकर अपना नाम पता पूछता है।

भरी भीड़ में भी जो तन्हाईयाँ ढूंढ़ता है, वो मेरा अक़्स ही तो है जो एक मनपसंद आईना ढूंढ़ता है।

चाहत को उसकी समझना इतना भी आसां नहीं है। जो ना आँखों से, ना ही शब्दों से अपना गम बयां करता है।

भरी भीड़ में भी जो तन्हाईयाँ ढूंढ़ता है, वो मेरा अक़्स ही तो है जो एक मनपसंद आईना ढूंढ़ता है।

©®दीपिका

https://www.instagram.com/p/B8whO53HnR9/?igshid=16xt8nrrrpeob

https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/02/10/bejuba-pyar/

माँ: एक फ़रिश्ता

शब्दों का जादू उसे खूब चलाना आता है,
वो माँ है, उसे सब पता चल जाता है।

मेरी आवाज से भाँप जाती है वो मेरे दर्द की गहराई को,
क्यूँ माँ? सच है ना,आप जान जाती हो, मेरी हर अनकही सच्चाई को

शब्द कम पड़ जाते है,जब भी लिखने बैठती हूँ आप के बारे में,
अब समझ पाती हूँ माँ, आपकी हर डांट के पीछे छिपी हुई भलाई को।

कहना चाहती हूँ बहुत कुछ, दिल में छुपा हुआ है।
आप का हाथ सिर पर हमेशा बना रहे बस, रब से इतनी सी दुआ है।

ऊपर भगवान और नीचे आपका कोई मोल नहीं है।

कौन पिरो सकता है माँ की ममता को शब्दों में, मेरे लिए तो ये सबसे पवित्र और अनमोल है।

आपकी हर सीख अब याद आती है माँ,हैरान हूँ तब इसे क्यूँ झुठलाती थी मैं माँ।

अजीब विडम्बना है, समय लगता है समझने में,बाद में तो सबसे अच्छी दोस्त बन जाती है माँ।

जंग जीवन की

Hello friends,

Life is a journey and we live this in phases. We have to face up and downs at various points. What I think about life, my feelings are here in the form of Hindi poem. I hope you like it.

Hindi Poetry

Jang Jeevan Ki ( जंग जीवन की)

साँसें चल रही है तो उम्मीद अभी भी बाकी है।
हारी नहीं हूँ मैं, कोशिश अभी भी जारी है।

माना कि मुश्किलों भरी है राह मेरी,
पर ढिगा नहीं है विश्वास मेरा, जंग अभी भी जारी है।

फिर उठूँगी गिर कर भी मैं, लड़खड़ाते क़दमों से भी,
कोई हो ना हो साथ मेरे पर ज़िन्दगानी अभी भी बाकी है।

भले ही जल गई हो लकड़ियाँ मेरे चूल्हे की,
पर उनकी राख अभी भी बाकी है।

जख्म हरे कर जाते है कुछ घाव पुराने भी,
आँखों में नमी हो भले ही पर होठों पर मुस्कान अभी भी बाकी है।

You can also read here.

Zindagi ka Safar”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/06/06/zindagi-ka-safar/

Vajood Jindagi ka”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/05/30/vajood-jindagi-ka/

Friends and Friendship: Poetry Expression!

Hello Friends!

I know, I am posting it late but I believe every day is a right day to express your feelings towards your loved ones.

Belated Happy Friendship Day to all my lovely friends in the community.

Thanks for supporting me always and guiding me with the valuable suggestions.

Here is today’s poem dedicated to friends and friendship.

“एक पाती दोस्ती के नाम”!

दोस्त बनाए नहीं जाते बन जाते है,
खुद बखुद रिश्तों के तार जुड़ जाते है।

दोस्त तेरी दोस्ती ने खुशकिस्मत बना दिया।
जो सजदा कहीं न मिला वो तेरी आँखों ने बयां किया।

तू मुझ से ज्यादा मुझ पर भरोसा दिखाता है।
ऐ दोस्त! बता ना, तुझे मुझमें ऐसा क्या नज़र आता है?

कहीं बार गिर कर उठा हूँ मैं तेरा सहारा लेकर,
ख़ुदा का बंदा है तू! भूल जाता है खुद दुआएँ देकर।

दुआ है बस, तेरा मेरा साथ यूँ ही बना रहे।
भले ही अलग हो जाए राहें, पर मंज़िलें आकर मिला करे।

You can also listen to the poem here.

https://youtu.be/B6K6362NCaM

For English readers, I am not translating this one yet expressing the same feeling. I hope you like it.

Some friends are really like a support system.

Never ditch you either in the worst situations.

They are very clear about their friendship goals.

Always ready to help their friend in each up and downs.

This gesture of my friend fills me with gratitude.

You are an awesome personality with a lovely attitude.

#deepikawrites

You can also read one of my Hindi poem on friendship. Here is the link.

“Dost Teri Dosti”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/07/02/dost-teri-dosti/

I hope you will like the poem. Thanks for reading.

Stay tuned.

Regards and Gratitude,

Deepika

दुआएँ

अकेले आए थे, अकेले ही चले जाना है।

कुछ जाएगा साथ नहीं हमारे,

बस मीठे बोल और अच्छे कर्मों को पीछे रह जाना है।

पता नहीं क्यूँ भागते रहते है हम पूरी ज़िंदगी, कुछ चंद टुकड़ों के पीछे।

एक दिन सबको यही इसी मिट्टी में ही मिल जाना है।

मीठी बोली, प्यार और अपनापन धरोहर है इंसानियत की,

कुछ ज्यादा खर्च नहीं होता अगर बाँटे हम दुख दूसरों के भी।

हमारी एक पहल से शायद किसी का दिन बन जाये,

किसी रोते हुए को ख़ुशी और सुकून के दो पल मिल जाए।

यही ज़िंदगी है, एक दूसरे का हाथ पकड़ कर आगे बढ़ चले।

कुछ अपनी कहे, कुछ सुने दूसरों की भी और यूँ ही सफ़र तय करते चले।

पैसों से भी अनमोल है ये दुआएँ,

अगर हो सके तो इनसे भी झोली भरते जाए।

वरना क्या बचता है इस ज़िन्दगी में?

अकेले आये थे,अकेले ही चले जाना है।

Regards and Gratitude!

Deepika

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/DuaayeBlessings-ec1mq3

You can also listen to the poem. Here is the link.

https://youtu.be/j0cbn7qYkUM

You can read another Hindi poem here.”Dost Teri Dosti”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/07/02/dost-teri-dosti/