ज़माना क्या माँपेगा….

ज़माना क्या माँपेगा…. उस पंछी की परवाज़ को,

उसके आगाज़ को और उसके अंजाम के अंदाज़ को….

जिसने कतरे हो खुद पंख उसके,और नाम दिया हो उसे उसकी बेहतरी के इंसाफ़ का…

उस हिज़ाब का, उस लिबाज़ का

जहाँ उसके क़दम उसकी ही बंदिशों में रुकने लगते है,

और दायरे औरों की मर्ज़ी के तकलुफ्फ़ में सिमटने लगते है।

तब वो खुद खुद को रोशन करने की ठान लेता है,

चाहत को अपनी तलवार बना जंग फान देता है।

जानता है ये जंग अपनी सोच से नहीं औरों की हैरानियों से है,

उनके विस्मय को बढ़ाती हुई उन पेशानियों से है।

©® दीपिकामिश्रा

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https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Episode-11-Kyun-Shir-Jhukaye-khada-hai-tu-ehan36

वो मेरे पापा है..

Happy Father’s Day

वो जो थोड़ा सकुचाते है, कितना है प्यार उन्हें अपने बच्चों से, थोड़ा कम ही बताते है।

वो मेरे पापा है,जो थोड़ा कम ही जताते है….

किसी भी चीज़ की कमी ना होने पाएं उनके प्यारों को, इसके लिए जो सारी तकलीफ़ सह जाते है।

वो मेरे पापा है जो थोड़ा कम ही जताते है…

जबसे समझा, उनको जाना पाया कि कैसे अपने तन का ना करके अपने बच्चों को सुंदर पोशाकों से सजाते है।

वो मेरे पापा है, जो थोड़ा कम ही जताते है….

क्या चाहिए हमें, उसकी लिस्ट पहले बनवाते है, खुद के फटे जूतों की सुध भी जो ना ले पाते है।

वो मेरे पापा है, जो थोड़ा कम ही जताते है….

उनके लिए क्या लिखूँ, क्या कहूँ, शब्द ही काम पड़ जाते है, जो चुप रहकर अपनी चुप्पी से ही काफ़ी कुछ कह जाते है।

वो मेरे पापा है, जो थोड़ा कम ही जताते है।

©® दीपिकामिश्रा

Happy Father’s Day….

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https://youtu.be/Gj2gSlW_cPE

खुद की सुनो।

अजीब दस्तूर है दुनिया का!

कुछ न करो तो “निकम्मा”
और करो तो “खुदगर्ज़” कहती है।

बेफिक्र होकर जियो तो “लापरवाह”
और कदम फूँक फूँक कर रखो तो “डरपोक” कहती है।

ज्यादा खर्च करो तो “दिखावा”
और बज़ट के अनुसार चलो तो “कंजूस” कहती है।

दूसरों के कहे अनुसार जीने लगे तो शायद ही आगे बढ़ पायेगें,
दिल में दबे अरमान और कुछ करने का जूनून यूँ ही घुट घुट कर दम तोड़ जायेगें।

ज़िंदगी जीनी है तो “जिंदादिली” से जिओ।
“कुछ तो लोग कहेगें ही, लोगों को कहने दो” की सोच को जहन में जिन्दा रखो।

©®दीपिका

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Khud-Ki-Suno-ec65ti