अहमियत


समझाना जितना जरूरी है, उतना समझना भी।बोलना जितना जरूरी है उतना सुनना भी।

बस यूँ ही कल्पनाओं के संसार में जिया नहीं जा सकता है। और बस यूँ ही एकतरफ़ा इन राहों पर चला नहीं जा सकता है।

शिकायतों के काँटों के बीच कुछ मुस्कराते फूल भी होने चाहिए।

किसी में कैसे हो सकती है सिर्फ कमियाँ ही, ये भी तो समझना चाहिए।

गर दे नहीं सकते साथ किसी का तो, बस सुन ही लो उसकी पुकार, यारों!

अँधेरोंमें भटकने के बाद दुबारा रोशनी पाने का उसका भी है अधिकार, यारों!

बोलना जितना जरूरी है उतना सुनना भी।

समझाना जितना जरूरी है उतना समझना भी।

~~दीपिका

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https://youtu.be/FvsmhObVUH8