खुद की सुनो।

अजीब दस्तूर है दुनिया का!

कुछ न करो तो “निकम्मा”
और करो तो “खुदगर्ज़” कहती है।

बेफिक्र होकर जियो तो “लापरवाह”
और कदम फूँक फूँक कर रखो तो “डरपोक” कहती है।

ज्यादा खर्च करो तो “दिखावा”
और बज़ट के अनुसार चलो तो “कंजूस” कहती है।

दूसरों के कहे अनुसार जीने लगे तो शायद ही आगे बढ़ पायेगें,
दिल में दबे अरमान और कुछ करने का जूनून यूँ ही घुट घुट कर दम तोड़ जायेगें।

ज़िंदगी जीनी है तो “जिंदादिली” से जिओ।
“कुछ तो लोग कहेगें ही, लोगों को कहने दो” की सोच को जहन में जिन्दा रखो।

©®दीपिका

https://anchor.fm/deepika-mishra/episodes/Khud-Ki-Suno-ec65ti