वो पहला कदम

हर वो पहला कदम उठाना मुश्किल होता है।
आशंकाओं भरे दिल को समझाना मुश्किल होता है।।

पता नहीं दूसरे देखते है हमें किस नजरिए से,
उनके हर सवाल का जवाब बन जाना मुश्किल होता है।

ये ज़िन्दगी हमारी है, कुछ फैसले हमारे भी हो सकते है,
खुद के लिए लिया हुआ एक फैसला उनके लिए पचाना मुश्किल होता है।

जब तक चले दूसरों के दिखाए रास्ते पर, तब तक तो ठीक।
अपने चुने हुए रास्ते को मंज़िल तक पहुँचाना मुश्किल होता है।

हर वो पहला कदम उठाना मुश्किल होता है।
आशंकाओं भरे दिल को समझाना मुश्किल होता है।।

©®दीपिका

दिल छोटा ना कर!

यूँ ही बीत जाएगी ज़िंदगी, बेवजह की गलफतों में,
कुछ दिल्लगी में, कुछ दिल की लगी में।

खुशियों का खज़ाना अपने अन्दर ही है, हम बेवज़ह बाहर ढूंढते है।

क्यूँ देते है हम उन चीज़ों को तवज्जों, जो हमें अन्दर ही अन्दर तोड़ता है।

तू खुद ही खुद के लिए काफ़ी है, तू ऱब का बंदा है।

जो ना समझे कीमत तेरी, वो भूल है उसकी, दूसरों का दिल दुखाना उसका तो रोज़ का धंधा है।

लगा रहे तू अपनी कोशिशों में, दूसरों की परवाह न कर।
एक दिन मिल जाएगा तू भी अपनी मंजिल से, दिल छोटा ना कर।

©®दीपिका

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/11/15/housalo-ki-udaan/

उलाहना

दूसरों पर ऊँगली उठा देना बहुत आसान होता है।
खुद को मासूम और उसको गुनहगार बता देना बहुत आसान होता है।

कभी फुर्सत हो तो बैठो और सुनो हाल ए दिल उसका भी,
शायद समझ पाओ कि हर सच को झूठ बता देना बहुत आसान होता है।

अंदाज़ा तभी लगाया जा सकता है मजबूरियों का उनकी,
गर खुद गुज़रे हो उस दोराहे से कभी।

ऐसे तो हर कोशिश पर उनकी सवाल उठा देना बहुत आसान होता है।
खुद के किये हुए को सही और दूसरों के व्यक्तित्व पर पैबंद लगा देना बहुत आसान होता है।

~©®दीपिका

माँ: एक फ़रिश्ता

शब्दों का जादू उसे खूब चलाना आता है,
वो माँ है, उसे सब पता चल जाता है।

मेरी आवाज से भाँप जाती है वो मेरे दर्द की गहराई को,
क्यूँ माँ? सच है ना,आप जान जाती हो, मेरी हर अनकही सच्चाई को

शब्द कम पड़ जाते है,जब भी लिखने बैठती हूँ आप के बारे में,
अब समझ पाती हूँ माँ, आपकी हर डांट के पीछे छिपी हुई भलाई को।

कहना चाहती हूँ बहुत कुछ, दिल में छुपा हुआ है।
आप का हाथ सिर पर हमेशा बना रहे बस, रब से इतनी सी दुआ है।

ऊपर भगवान और नीचे आपका कोई मोल नहीं है।

कौन पिरो सकता है माँ की ममता को शब्दों में, मेरे लिए तो ये सबसे पवित्र और अनमोल है।

आपकी हर सीख अब याद आती है माँ,हैरान हूँ तब इसे क्यूँ झुठलाती थी मैं माँ।

अजीब विडम्बना है, समय लगता है समझने में,बाद में तो सबसे अच्छी दोस्त बन जाती है माँ।

Friends and Friendship: Poetry Expression!

Hello Friends!

I know, I am posting it late but I believe every day is a right day to express your feelings towards your loved ones.

Belated Happy Friendship Day to all my lovely friends in the community.

Thanks for supporting me always and guiding me with the valuable suggestions.

Here is today’s poem dedicated to friends and friendship.

“एक पाती दोस्ती के नाम”!

दोस्त बनाए नहीं जाते बन जाते है,
खुद बखुद रिश्तों के तार जुड़ जाते है।

दोस्त तेरी दोस्ती ने खुशकिस्मत बना दिया।
जो सजदा कहीं न मिला वो तेरी आँखों ने बयां किया।

तू मुझ से ज्यादा मुझ पर भरोसा दिखाता है।
ऐ दोस्त! बता ना, तुझे मुझमें ऐसा क्या नज़र आता है?

कहीं बार गिर कर उठा हूँ मैं तेरा सहारा लेकर,
ख़ुदा का बंदा है तू! भूल जाता है खुद दुआएँ देकर।

दुआ है बस, तेरा मेरा साथ यूँ ही बना रहे।
भले ही अलग हो जाए राहें, पर मंज़िलें आकर मिला करे।

You can also listen to the poem here.

https://youtu.be/B6K6362NCaM

For English readers, I am not translating this one yet expressing the same feeling. I hope you like it.

Some friends are really like a support system.

Never ditch you either in the worst situations.

They are very clear about their friendship goals.

Always ready to help their friend in each up and downs.

This gesture of my friend fills me with gratitude.

You are an awesome personality with a lovely attitude.

#deepikawrites

You can also read one of my Hindi poem on friendship. Here is the link.

“Dost Teri Dosti”

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/07/02/dost-teri-dosti/

I hope you will like the poem. Thanks for reading.

Stay tuned.

Regards and Gratitude,

Deepika