योग्यता

योग्यता क्या है तुझमें? तू ये भली भांति जनता है।
तो फिर क्यूँ पड़ता है गर्दिशों में, अगर सच्चाई को पहचानता है।

दूसरों की कही बातें, हो सकता है छलावा हो।
तू गर खुद में है काबिल इतना तो फिर किस बात का दिखावा हो?

ये तो दुनिया है, कुछ तो लोग कहेंगें ही।
फैसला तुमको करना है कि तुम उलझते हो या बच निकलते हो सादगी के संग ही।

तेरी रूह की सच्चाई को वो भी झुठला ना पाएगा।
तू निकल जाएगा आगे इन दलदलों से और वो हाथ मलता रह जाएगा।

©®दीपिका