प्यार की ताक़त

प्यार की ताक़त वो ही जान सकता है जिसने कभी सच्चा प्यार किया हो या पाया हो।

प्यार की ताक़त

प्यार में वो ताक़त है जो पत्थर को भी पिघला दे, हाँ जी, मैंने पत्थर को पिघलते देखा है।

जिसे फ़र्क नहीं पड़ता था दुनिया के दस्तूरों से, उसे किसी अंजाने के लिए झुकते हुए देखा है।

प्यार बंधन नहीं है, दो दिलों का वो अटूट नाता है,

जहाँ हिसाब नहीं रखा जाता है कि पहले कौन माफ़ करता है या पहले कौन रूठ जाता है?

प्यार एक अविरल धारा है जो एक ही दिशा में बहती रहती है।

चाहे कोई कितना भी दम लगा ले, वो अपने साथी के लिए चट्टान सी खड़ी रहती है।

लेन देन की दुनिया से बहुत ऊपर होता है उस प्यार का अहसास।

सिर्फ वो एक ही समझ सकता है कि क्या है इसमें, क्यूँ है ये एहसास इतना खास।

प्यार नुमाइश नहीं चाहता है और ना ही चाहता है बेवफाई,

सुकून की ज़िंदगी की चाहत होती है उसे, ना कि व्यर्थ के अहम की लड़ाई।

प्यार दोनों पलड़ों में हिसाब बैठाना जानता है,

क्या होती है अहमियत इस रिश्ते की, इसे भली भांति पहचानता है।

प्यार में वो ताकत है जो पत्थर को भी पिघला दे, हाँ जी, मैंने पत्थर को पिघलते देखा है।

जिसे फ़र्क नहीं पड़ता था दुनिया के दस्तूरों से, उसे किसी अंजाने के लिए झुकते हुए देखा है

©®दीपिका

बेजुबां प्यार

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माँ की जादूगरी!

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नज़रिये का फेर!

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मन की सुंदरता!

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लम्हे जो बीत गए है।

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बीते कल की परछाई!

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जंग दिल और दिमाग की!

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हज़ारों बहाने है जीने के!

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गमों के बादल!

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वो एक फ़रिश्ता!

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इंसानियत कुछ खो सी गई है!

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और भी दर्द है इस ज़माने में!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/04/aur-bhi-dard-hai-is-zamane-main/

चलो फिर से शुरू करते है।https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/03/chalo-phir-se-shuru-karte-hai/

बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?

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अजीब दास्तां है ये!

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माँ की जादूगरी!

शब्दों का जादू उन्हें बखूबी चलाना आता है,

वो मेरी माँ है, जिनकी डांट में भी प्यार नज़र आता है।

उन्हें पता है बहुत अच्छे से, कब कान सीधा और कब घुमाकर पकड़ना है।

कब कितना गुस्सा करना है और कब प्यार दिखाना है।

वो मेरी माँ है,

जिनकी डांट में भी प्यार नज़र आता है।

मेरी हर अनकही को जो बिन बोले ही समझ ले।

सिर्फ भाव पढ़कर ही जो दिल का हाल बता दे।

मेरी भूख प्यास का हिसाब जो मुझसे ज्यादा रखे।

कभी नारियल सी सख्त तो कभी मोम सी कोमल लगे।

वो मेरी माँ है,

जिनकी डांट भी प्यारी लगे।

वो मेरी माँ है जो मुझे जग से प्यारी लगे।

मेरी हर तकलीफ़ में मेरे साथ खड़ी रहती है,

दूर हो भले ही शरीर से पर आत्मा से जुड़ी रहती है।

मेरी हर कमी को मेरी ताक़त बनाने में लगी रहती है,

मुझ से ज्यादा विश्वास जो मुझ पर करती है।

वो मेरी माँ है,

जो मुझ पर अपनी जान न्यौछावर करती है।

वो मेरी माँ है जो मेरे लिए दुनिया से लड़ जाती है।

वो मेरी माँ है,

जिसे शब्दों का जादू बखूबी चलाना आता है,

वो मेरी माँ है,

जिनकी डांट में भी प्यार नज़र आता है।

©®दीपिका

नज़रिये का फेर!

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मन की सुंदरता!

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जंग दिल और दिमाग की!

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नज़रिए का फेर!

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है,

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है।

किसी को सिर्फ कमियां तो किसी को उनसे बाहर निकलने का रास्ता नज़र आता है।

सही तो है,

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है।

ये उनका नज़रिया ही तो होता है जो हमें कभी अर्श पर तो कभी फर्श पर बिठाता है।

कभी उनकी आँखों का तारा तो कभी उनकी नज़रों से गिराता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

ये तो बस नज़रिए पर निर्भर करता है

किसी को गिलास आधा खाली तो किसी को आधा भरा दिखाई देता है

जैसा हम सोचते है, वैसा ही हमारा नज़रिया बनता जाता है।

हमें पता भी नहीं चलता, कब दूसरे के लिए बोला हुआ एक एक गलत शब्द, हम पर ही भारी पड़ जाता है।

ये नज़रिया ही तो है जो हमें कभी देवदूत की संज्ञा तो कभी पतन की ओर ले जाता है।

©®दीपिका

मन की सुंदरता!

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लम्हे जो बीत गए है।

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बेमक़सद जीना भी कोई जीना है?

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मन की सुंदरता!

बाहरी काया पर तो सबका ध्यान होता है पर भीतर क्या है,

ये कितने जानना चाहते है?

अगर भाया नहीं रंग रूप फिर भी,

मन की सुदंरता के लिए कितने आगे आते है?

शायद बहुत कम मिलेंगे जिनके लिए मन का सुंदर होना ज्यादा जरूरी होता है, तन के सुंदर होने से।

उन्हें आकर्षण होता है उनकी बातों का, उस आभा का, ना कि फ़र्क पड़ता है क्षणभंगुरी काया से।

बाहरी आकर्षण का क्या है?

आज है ,कल नहीं रहेगा!

भीतरी सुदंरता ही अलौकिक है, शाश्वत है, इसका अस्तित्व तो सदा बना रहेगा।

जिसके मन में मैल न हो उसकी आभा में एक अलग सी चमक दिखाई देती है।

महसूस कर सकते हो उस रूहानी अनुभव को, एक इबादत सी, एक दुआ सी सुनाई देती है।

बाहरी काया पर सबका ध्यान होता है पर भीतर क्या है,

ये कितने जानना चाहते है?

अगर भाया नहीं रंग रूप फिर भी,

मन की सुदंरता के लिए कितने आगे आते है?

©®दीपिका

लम्हे जो बीत गए है।

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बीते कल की परछाई!

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जंग दिल और दिमाग की!

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हज़ारों बहाने है जीने के!

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गमों के बादल!

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वो एक फ़रिश्ता!

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इंसानियत कुछ खो सी गई है!

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लम्हे जो बीत गए है!

लम्हे जो बीत गए है, अब वापस कभी नहीं आएँगे।

चाहे अब उन्हें कितनी भी शिद्द्त से, फिर उनसे न मिल पाएँगे।

इसलिए कहते है कि आज में जिओ,

ये पल यादें ना बन जाएं, इन्हें संजोते चलो।

क्योंकि

लम्हे जो बीत गए है, अब वापस कभी नहीं आएँगे।

चाहे अब उन्हें कितनी भी शिद्द्त से, फिर उनसे न मिल पाएँगे।

जो भी करना चाहते हो, इसी पल में करो, इसी पल को जिओ,

कल कर लेंगे, कल कर लेंगे, इस आदत से बचो।

क्योंकि

कल क्या होगा, ये किसको पता?

कल की फ़िक्र में क्यूँ करे अपना आज लापता

बाद में तो पछताने के अलावा कुछ नहीं बचता,

क्यूँ जिए छलावे में जब आज हाथ में है शफ़ा।

क्योंकि

लम्हे जो बीत गए है, अब वापस कभी नहीं आएँगे।

चाहे अब उन्हें कितनी भी शिद्द्त से, फिर उनसे न मिल पाएँगे।

©®दीपिका

बीते कल की परछाई!

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जंग दिल और दिमाग की।

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बीते कल की परछाई!

बीते कल की परछाई!

लोग कहते है कि बीते कल में जिया नहीं करते,

हाथों से रेत फिसल जाने के बाद मुट्ठी मला नहीं करते।

पर बीते कल की परछाईयाँ आपका पीछा कहाँ छोड़ती है?

कितना भी भूलने की कोशिश करो, कहीं न कहीं जहन में जिंदा रहती है।

कभी हिम्मत तो कभी उदासी देती है,

कभी कुछ नाज़ुक पल की यादें तो कभी आगे बढ़ने की नसीहत देती है।

बहुत कुछ सीखते है हम बीते कल की परछाइयों से,

कुछ की गई गलतियों से तो कुछ उन्हें ना दोहराने की कोशिश में खुद से की गई लड़ाईयों से।

इतना भी आसां नहीं होता, अतीत से पीछा छुड़ा लेना,

पर मिलता क्या है याद करने से, ये भी एक गंभीर बहस का मुद्दा है।

अगर अच्छाई लेकर आगे बढ़ रहे है, तो फिर भी ठीक है,

पर गर “रंजिश ए गम” पाल रखा है तो बहुत मुश्किल है।

जल्द से जल्द बाहर निकलना होगा इन परछाइयों से,

बीते दिनों की मायूँसियों से और तन्हाईयों से।

सच है कि बीते कल में जिया नहीं करते।

हाथों में से रेत फिसल जाने के बाद मुट्ठी मला नहीं करते।

©®दीपिका

दिल और दिमाग़ की जंग!

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इंतज़ार अच्छे वक़्त का!

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हज़ारों बहाने जीने के!

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गमों के बादल!

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जंग दिल और दिमाग की!

ये जंग है दिल और दिमाग की, देखते है कि आखिर कौन जीतता है?

दिल और दिमाग के बीच कुछ मुद्दों को लेकर फर्क़ साफ़ साफ़ दिखाई देता है।

दिल बड़ी साफ़ गोही से सब कुछ कह देना चाहता है,

पर ये दिमाग है ना, बड़ा शातिर है, गोल गोल घुमाते रहना चाहता है।

लोग कहते है कि दिल से लिए फैसले अक्सर सही नहीं होते,

जो उठाते है फ़ायदा आपकी भावनाओं का, वो कतई विश्वास करने लायक नहीं होते।

कुछ ऐसे भी होते है जो हर चीज़ को दिमाग के तराजू से तोलते है,

अगर लगता है फायदे का सौदा तो ही किसी रिश्ते में आगे बढ़ते है।

ये जंग है दिल और दिमाग की, देखते है कि आखिर कौन जीतता है?

दिल और दिमाग के बीच कुछ मुद्दों को लेकर फर्क़ साफ़ साफ़ दिखता है।

मेरी नज़र में रिश्ते दिल से निभाए जाते है, ज्यादा दिमाग लगाने की जरूरत होती नहीं है।

गर महसूस कर सकते हो तकलीफ़ उसकी भी तो यही सच्ची कसौटी है।

कुछ रिश्तों को वक़्त के हवाले कर देना ही समझदारी होती है।

अगर अपने है तो लौट कर आएंगे वरना इंतज़ार करते करना एक मज़बूरी बन जाती है।

ये जंग है दिल और दिमाग की, देखते है कि आखिर कौन जीतता है?

दिल और दिमाग के बीच कुछ मुद्दों को लेकर फर्क़ साफ़ साफ़ दिखता है।

©® दीपिका

इंतज़ार अच्छे वक़्त का!

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हज़ारों बहाने जीने के!

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इंतज़ार अच्छे वक़्त का!

हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रहते जाते है,

कुछ पीछे छूट जाता है तो कुछ हम खुद छोड़ के आगे बढ़ जाते है।

ऐसा कर के कभी खुद को धोखा देते है,तो कभी किसी और से धोखा पाते है।

और फिर एक बार हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रह जाते है।

समय का पहिया गतिमान है किसी के लिए नहीं रुकता है,

हमें ही समझनी होती है उसकी गति और खुद ही सामंजस्य बिठाना पड़ता है।

गलती हमारी होती है और हम दूसरों पर दोष मढ़ते रह जाते है,

और हम फिर यूँ ही हाथ पर हाथ रखकर अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रह जाते है।

समय रहते ही चीजों को सुधारने की कोशिश की होती तो शायद नज़ारे कुछ और होते।

हमारे भी परिश्रम और सफलताओं के किस्से चहुँ ओर होते।

अच्छे वक़्त का इंतज़ार नहीं, अच्छा वक्त खुद के लिए कमाना पड़ता है।

खुद को हर उस हारी हुई सोच से ऊपर उठाकर जीत के क़ाबिल बनाना पड़ता है।

वरना हम अच्छे वक़्त का इंतज़ार ही करते रहते जाते है,

कुछ पीछे छूट जाता है तो कुछ हम खुद छोड़ के आगे बढ़ जाते है।

©®दीपिका

हज़ारों बहाने है जीने के!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/09/hazaro-bahane-hai-jeene-ke/

गमों के बादल!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/08/gamo-ke-baadal/

वो एक फ़रिश्ता!https://myaspiringhope.wordpress.com/2020/04/06/vo-ek-pharista/

इंसानियत कुछ खो सी गई है!

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हज़ारों बहाने जीने के!

एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खुल ही जाता है।मुश्किलों की जड़ें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही आता है।

असफलता बंद नहीं कर सकती है द्वार सफलता के,

अगर हल खोजे जाएं तो हज़ारों बहाने निकल ही आएंगे खुल के जीने के।

कितना आसान होता है, हार मान कर बैठ जाना,

ये तो मुझसे होगा ही नहीं, ऐसा सोचकर जंग लड़ने से पहले ही हथियार डाल देना।

शायद एक कोशिश एक नई आशा का द्वार खोल सकती है,

जो कल तक था असंभव, उस पर विश्वास की एक नई कोंपल अंकुरित हो सकती है।

जरूरत है तो बस थोड़ा धैर्य रखने की,लगातार कोशिशें करने की,

हिम्मत नहीं हारने की,बिगड़ी बनाने की और अनसुलझी सुलझाने की।

एक छोटी सी हार से क्यूँ जिंदगी अपने मायने खो देती है?

क्या सस्ती है जान इतनी कि हर चौराहे पर बोली लगा करती है।

विश्वास रखो कि

एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खुल ही जाता है।मुश्किलों की जड़ें कितनी ही गहरी क्यूँ ना हो, हल निकल ही जाता है।

©® दीपिका

गमों के बादल!

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गमों के बादल!

कैसे है आप सभी लोग? आशा करती हूं कि आप सभी लोग सकुशल अपने परिवार के साथ सुरक्षित होंगे।

चलिए “बातें कुछ अनकही सी,” के किस्से को आगे बढ़ाते है।

आज की कविता उस आशा के नाम, जिसका दीपक हम सभी के दिलों में जल रहा है। ज़ाहिर है कठिन वक्त है पर हौंसला नहीं खोना है।

गमों के बादल!

गमों के बादल छंट ही जाएंगे और फिर से रोशनी का नया सूरज निकलेगा।

फिर से खिल उठेगा आँगन, महकते फूलों की खुशबूओं से, फिर से ये वीराना चमन बनेगा।

आएंगे फिर से खुशियों के मौसम और फिर से कोई पगला दीवाना बनेगा।

सच है कि आसां नहीं होता, मायूँसियों के भँवर से बाहर निकलना,

पर ये भी सच है कि आशा की सिर्फ एक किरण से गमों का अंधेरा दूर भगेगा।

फिर से खिल उठेगा आँगन, महकते फूलों की खुशबूओं से, फिर से ये वीराना चमन बनेगा।

छोटी सी ही तो है ये ज़िन्दगानी, पता नहीं कब कौन आएगा और कब कौन चला जाएगा?

तो अच्छा है जब पता है इतनी बात, तो ये समझना और भी आसां हो जाएगा।

अगर साथ हो अपनों का तो हर मुश्किल का सामना करना आसां हो जाएगा।

पर गर हो अकेले तुम राहों में तो गम नहीं, खुद तेरा हौंसला ही तुझे राह दिखाएगा।

फिर से खिल उठेगा आँगन, महकते फूलों की खुशबूओं से, फिर से ये वीराना चमन बनेगा।

©® दीपिका

आशा करती हूं कि इस कविता ने थोड़ी सकारात्मकता जरूर दी होगी।

वो एक फ़रिश्ता!

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