तेरा मेरा साथ

तेरा मेरा साथ यूँ ही बना रहे, मैं तेरी हमराही, तू हमसाया यूँ ही बना रहे।

उबड़ खाबड़ पथरीले रास्तों पर, थांमें एक दूसरे का साथ, मैं तेेरी हमसफ़र, तू साथी मेरा बना रहे।

महज़ रिश्ता नहीं ये प्यार की डोर है, मैं तेरी सजनी, तू साजन यूँ ही बना रहे।

मैं महकूँ खुशबू से तेरी और घर उपवन सा सजा रहे।

लग जाए उम्र तुझे मेरी भी और दिन तुझे देख देख कर यूँ ही गुजरा करे।

ना जाने कैसा रिश्ता बनाया है ऱब ने ये, कि महज दूरी के एहसास से ही, दिल सुबक सुबक कर रोया करे।

तेरा मेरा साथ यूँ ही बना रहे, मैं तेरी हमराही, तू हमसाया यूँ ही बना रहे।

©®दीपिका

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Deepika

ज़िंदगी तो जिंदादिली से जीने का नाम है।

ज़िंदगी तो जिंदादिली से जीने का नाम है।
सपनों को पीछे छोड़कर जीना कोई ज़िंदगी थोड़े ही है, समझौता है।

अगर आता है हुनर जीने का तो क्या फ़र्क पड़ता है कि कौन बड़ा और कौन छोटा है?

अच्छाई का हमेशा बाँहें फैलाकर स्वागत करो।
और लगे अगर जकड़े हो किसी बुराई से तो उसे स्वीकार कर, बदलने की कोशिश करो।

तुरंत फल की चाहत में कर्मों का लेखा ज़ोखा बिगाड़ना सबसे बड़ी बेवकूफी है।

अगर की है शिद्दत से मेहनत तो फल जरुर मिलेगा,खुद पर विश्वास रखना बेहद जरुरी है।

ज़िंदगी तो जिंदादिली से जीने का नाम है।

©® दीपिका

दिल छोटा ना कर!

यूँ ही बीत जाएगी ज़िंदगी, बेवजह की गलफतों में,
कुछ दिल्लगी में, कुछ दिल की लगी में।

खुशियों का खज़ाना अपने अन्दर ही है, हम बेवज़ह बाहर ढूंढते है।

क्यूँ देते है हम उन चीज़ों को तवज्जों, जो हमें अन्दर ही अन्दर तोड़ता है।

तू खुद ही खुद के लिए काफ़ी है, तू ऱब का बंदा है।

जो ना समझे कीमत तेरी, वो भूल है उसकी, दूसरों का दिल दुखाना उसका तो रोज़ का धंधा है।

लगा रहे तू अपनी कोशिशों में, दूसरों की परवाह न कर।
एक दिन मिल जाएगा तू भी अपनी मंजिल से, दिल छोटा ना कर।

©®दीपिका

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/11/15/housalo-ki-udaan/

हौंसलों की उड़ान

आधा फासला तय किया है अभी, आधा करना बाक़ी है।
तय की है दूरी ये भले ही लड़खड़ाते क़दमों से, पंखों की उड़ान तो अभी बाक़ी है।

आँखों से ओंझल है लक्ष्य और तूफानों का दौर है।
पर विश्वास ढिगा नहीं है बिल्कुल भी, जीतने की चाह अभी भी बाक़ी है।

जैसे खड़ी रहती है चट्टान हजारों चोटें सहने के बाद भी।
वैसे ही है हौंसलें की ताक़त मेरी, जो और मज़बूत हो जाती है हर नई चुनौती के साथ ही।

कठिन है सफ़र ये मेरा और ख्वाहिशों में रंग भरना बाक़ी है। ये तो बस अभी शुरुवात है, हौंसलों की उड़ान तो अभी बाक़ी है।

©®दीपिका

https://myaspiringhope.wordpress.com/2019/11/04/kyun-katnni-aur-karni-mein-itna-antar-hai/