Happy Diwali 2019

Wishing you all a very happy, healthy and prosperous Diwali!

I know, I am late but it’s never too late to wish to our close ones. And you all are my family too.

May God bless you all with good health and with fortune!

Eat sweets, be happy but take care of your health too.

Lots of lots of good wishes for all the upcoming opportunities.

May the festival fill your life with great joy, happiness and satisfaction!

Regards,

Deepika

https://youtu.be/nuDxZXdByEU

बीमारी में फर्क कैसा?

उषा किचन साफ़ करके जैसे ही बिस्तर पर आई तो महसूस किया कि उसका पूरा बदन तेज़ बुखार से तप रहा था, कमज़ोरी भी महसूस हो रही थी।

उसने दवाई ली और सोने की कोशिश करने लगी पर दर्द की वजह से ठीक से सो नहीं पा रही थी, पूरी रात इधर से उधर करवट बदलती रही। आँख लगी ही थी कि हॉल से आवाज़ आई, आज चाय नहीं मिलेगी क्या?

उषा को एहसास हुआ कि सुबह हो चुकी थी, पति को अपनी तबियत के बारे में बिन बताए जैसे तैसे उसने नाश्ता बनाया और टिफिन पैक करके पति को ऑफिस और बच्चों को स्कूल भेजा।

अब उषा बिल्कुल भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी वह अपने कमरे में जाकर बिस्तर पर लेट गयी। उषा की सासूमाँ इस बात से मन ही मन परेशान होने लगी थी कि अब आज खाना कौन बनाएगा?

उषा बिस्तर पर लेटे लेटे ये सोचने लगी कि कैसे वह सबके लिए उनकी एक छींक आने पर भी एक टांग पर खड़ी रहती है। दवाई, खाना-पानी सबको टेबल पर रखा मिल जाता है और आज जब वो बीमार है तो उसकी तबीयत ख़राब होने से ज्यादा परेशान लोग इस बात से है कि काम कौन करेगा?

उसकी आँखों से आँसू आ गए कि खाने में नमक कितना पड़ेगा और मसाले का हिसाब क्या है ये तक बताने के लिए अब उसे बार बार बिस्तर से उठना पड़ेगा।

वह सोच में पड़ गयी कि कीमत क्या है उसकी इस घर में? एक काम करने वाली बाई को भी महीने में पाँच छह छुट्टी मिल ही जाती है, वो भी अपनी शर्तों पर ही काम करती है घर में। कोई ज्यादा ना नुकर करता है तो फट से बोल देती है “हिसाब कर दो मेरा”।

पर एक बहु का क्या इतना भी हक़ नहीं है कि बीमार पड़ने पर वो अपनी मर्ज़ी से आराम तक कर सके? अगर उसका मन न करे काम करने का तो खुलकर अपनी तकलीफ अपने परिवार वालों के सामने रख सके।

उसे डर ना हो इस बात का कि उसे इस बात के लिए भी ताना सुनाया जायेगा कि “आजकल की बहुएँ तो छुइमुई सी हो गयी है, हवा लगते ही बीमार पड़ जाती हैं।”

ये सब सोचते सोचते ना जाने कब उसे झपकी लग गयी, उसकी नींद फिर एक आवाज़ से टूटी। “बहु बच्चे आने वाले है, खाना नहीं बनेगा क्या आज?”

उषा धीरे से उठते हुए और अपने कपड़ों को सही करते हुए किचन की तरफ कदम बढ़ा देती है।

“एक औरत से माँ बनने का सफ़र” जितना सुखदायी उतना ही चुनौतीपूर्ण, 7 ध्यान देने वाले बिंदु।

माँ ये नाम सुनते ही एक अलग ही भाव की अनुभूति होती है, दया, ममता, करुणा और धैर्य की मूरत माँ।

पर क्या एक औरत से माँ बनने का सफ़र इतना आसान होता है?

शायद नहीं, बिल्कुल नहीं।

एक औरत को माँ बनने के लिए ना केवल शारीरिक परिवर्तनों का सामना करना पड़ता है बल्कि मानसिक तौर पर भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

जो लड़की कल तक शायद खुद की ज़िम्मेदारी ठीक से संभाल नहीं पाती थी, रातों रात एक जिम्मेदार माँ के चोले से ढ़क दी जाती है, कोई नहीं पूछता उसने भी कि किन परेशानियों से उसे भी जूझना पड़ रहा है उसे भी?

पहली बार माँ बनने का अनुभव जितना ख़ास होता है शायद उतना ही अवसादपूर्ण होता है कई महिलाओं के लिए क्यूँकी उन्हें समझ में ही नहीं आता है कि कैसे खुद को संभालें और कैसे उस नन्हीं की जान को?

क्या किया जाए इस स्थिति से बचने के लिए?

1.सबसे पहले माँ को मानसिक संबल दिया जाए कि उसमें इतनी ताकत खुद भगवान ने दी है कि वह इस अनुभव को यादगार बना सके।

2.उसे अकेला न छोड़ा जाए,अगर परिवार में उस समय कोई मदद के लिए नहीं उपलब्ध नहीं है तो आया और दाई को पहले से ही नियुक्त कर लिया जाए।

3.अगर परिवार साथ में है तो जज्जा की पूरी तरह से देखभाल की जाए ना कि बार बार इस बात का एहसास कराया जाये कि वो क्या दवाब महसूस कर रहे है इस बदलाव से?

4.प्यार,अपनापन,स्नेह हर घाव को जल्दी भरने में मदद करता है चाहे वो शारीरिक हो या मानसिक। इस समय पति का रोल भी बहुत अहम् हो जाता है, जितना ज्यादा वक़्त वह पत्नी और नवजात शिशु के साथ बिताएगा उतना ही मनोबल और ढाढ़स पत्नी को मिलेगा।

5. नवजात शिशु और जज्जा की नींद ठीक तरह से पूरी हो, इस बात का ख़ास ख्याल रखा जाना चाहिए।

6.माँ के खान पान का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए जिससे कि वह जल्दी से जल्दी खुद को स्वस्थ महसूस कर सके।

7. माँ खुश रहे इस बात को पूरी तवज्जों दी जानी चाहिए। नींद पूरी न होने की वजह से या किसी और कारण से अगर वह खुश नहीं है तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और डॉक्टर की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

माँ बनना एक जिम्मेदारी है एक नयी ज़िंदगी को जन्म देने की और एक नए सफ़र की शुरुआत करने की जिसमें यदि पूरे परिवार का प्यार और सहयोग साथ हो तो ये सफ़र बहुत सुखदाई और यादगार हो जाएगा।

तेरा मेरा रिश्ता #करवाँचौथस्पेशल

ना जाने कौनसा तार जुड़ा हुआ है दिल का तुमसे,
नज़रें हट भी जाए चेहरे से तो यादों के साए घेरे।

अब तो साँसे भी पहचानती है आहट को तेरी,
बोलो न बोलो तुम,महसूस होती है आशिक़ी आँखों से तेरी।

हर बात घूम फ़िर कर तुम पर ही आकर ठहर जाती है,
तुमसे ही शुरू होती है ज़िंदगी और तुम पर ही खत्म हो जाती है।

लगते हो प्यारे तुम ख़ुदा की नेमत जैसे,
हर नाजुक घड़ी में दिल तेरा साथ ढूंढ़े।

माँगती हूँ रब से हर पल तेरी सलामती की दुआ,
तू है हमसाया मेरा और मैं तेरी रहनुमा।

©®दीपिका

करवाँ चौथ की ढेरों शुभकामनाएं

My Singing “Karwa Choth Surprise” for Husband

https://youtu.be/YdgXBWFPmZA

तंज़

दूसरों के लिए छोटा पर उसके लिए उसका आत्मसम्मान तब शायद सबसे बड़ा हो जाता है।

अपने ज़मीर की आवाज़ सुनना अब उसके लिए बेहद जरुरी हो जाता है।

हर दूसरे पल सवाल उठाया जाता है जब उसके अस्तित्व पर,
मौन रहकर भी बिना कुछ बोले ही सिर्फ भंगिमाओं से उसे दोषी ठहराया जाता है।

खो देती है वो अपनी पहचान अपनी नज़रों में ही, जब उसे उसका ही अक्श दूसरों के चश्मों से दिखाया जाता है।

पड़ जाती है सोच में कि किया क्या है ऐसा उसने? जो हर बार हर गलती का ज़िम्मेदार उसे ही ठहराया जाता है।

©®दीपिका

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